पटना, 17 अक्टूबर 2026 : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। इस तरह राज्य में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक परियोजनाओं को मंजूरी दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत राज्य में करीब 2,424 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए कुल 1,64,518 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को स्वीकृति मिली है। इन योजनाओं में सड़क चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण, बाईपास, चार लेन की सड़कें और रेल ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण शामिल है। इससे बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर होने, यात्रा का समय घटने और माल परिवहन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि सभी सड़कों का निर्माण शुरू हो चुका है।
बिहार में किन सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी ?
इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इस बैठक में बिहार के पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग और बिहार पथ निर्माण विभाग की 18 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनकी कुल लंबाई लगभग 739 किलोमीटर और अनुमानित लागत 24,940 करोड़ रुपये बताई गई है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं :
- NH-333A : बरबीघा से झारखंड की ओर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण।
- दरभंगा–जयनगर NH : इस मार्ग के विकास से उत्तर बिहार में सड़क संपर्क बेहतर हो जाएगी।
- बरियारपुर–बिशनपुर खंड: संबंधित सड़क खंड के विकास की योजना।
- सीतामढ़ी–चिरौत खंड: इस मार्ग के विकास और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजना।
- बाईपास और चार लेन सड़कें: अलग-अलग क्षेत्रों में यातायात सुगम बनाने के लिए परियोजनाएं।
- रेल ओवरब्रिज: NH-120 और NH-727 पर विभिन्न स्थानों पर ROB निर्माण की योजनाएं।
NHAI की 14 परियोजनाओं पर खर्च होंगे ₹1.39 लाख करोड़
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 14 परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, इनकी कुल लंबाई लगभग 1,685 किलोमीटर और अनुमानित लागत 1,39,578 करोड़ रुपये है। इनमें प्रमुख परियोजनाओं के तौर पर गोरखपुर–किशनगंज–सिलीगुड़ी, रक्सौल–हल्दिया, बक्सर–भागलपुर, मुजफ्फरपुर–बरौनी, छपरा–रेवाघाट–मुजफ्फरपुर और पटना नॉर्दर्न रिंग रोड का उल्लेख किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से 8 जिलों को फायदा
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे भी इस योजना की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी कुल लंबाई करीब 568 किलोमीटर है, जिसमें बिहार में लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेसवे बिहार के आठ जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरने वाला है। इससे उत्तर बिहार और पूर्वोत्तर भारत की ओर सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
राम जानकी पथ के तीसरे और चौथे पैकेज को मंजूरी
राम जानकी पथ के पहले और दूसरे पैकेज पर निर्माण कार्य पहले से जारी होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने चालू वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना में तीसरे और चौथे पैकेज को भी मंजूरी दी है। इन दोनों पैकेजों पर करीब 8,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना पूरी होने के बाद इससे जुड़े क्षेत्रों में आवागमन, धार्मिक पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
बिहार को क्या होगा फायदा ?
इन सड़क परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है:
- प्रमुख शहरों और जिलों के बीच बेहतर सड़क संपर्क।
- माल ढुलाई और व्यापार में सुविधा।
- यात्रा के समय और यातायात दबाव में संभावित कमी।
- पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा।
- निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार के अवसर।
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के मुताबिक, इन परियोजनाओं से राज्य की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण शुरू होने की तारीख और पूरा होने की समयसीमा अलग-अलग चरण हैं। संबंधित सड़कों के पैकेज, मार्ग और निर्माण की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों से की जानी चाहिए।




