पटना, 17 अक्टूबर 2026 : बिहार में भ्रष्ट अफसरों की काली कमाई का कच्चा चिट्ठा अब खुलने लगा है। इन अफसरों के पास बेशुमार संपत्ति है। इस तरह बिहार में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई अधिकारियों के निवेश और संपत्तियों को लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई में बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई है। कुछ मामलों में होटल, चाय बागान, म्यूचुअल फंड, बैंक एफडी और भविष्य निधि (PF) में निवेश के विवरण भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां इन मामलों में संपत्तियों के स्रोत, वास्तविक मालिकाना हक और अधिकारियों की घोषित आय के साथ निवेश का मिलान कर रही हैं। हालांकि आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की अभी गहन जांच जारी है।
सिलीगुड़ी से गंगटोक तक निवेश की जांच
जांच के दौरान पटना, दानापुर, सगुना मोड़, फुलवारीशरीफ और रूपसपुर जैसे इलाकों के अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग तथा सिक्किम की राजधानी गंगटोक में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में संपत्तियां पत्नी या अन्य परिजनों के नाम पर खरीदे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना काफी अहम है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था और क्या निवेश संबंधित अधिकारियों की ज्ञात आय के अनुरूप था।
पांच मामलों में करोड़ों की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज
चंद्रशेखर सिंह : सिलीगुड़ी में जमीन का मामला
ग्रामीण कार्य विभाग के छपरा कार्यालय में कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के मामले में उनकी पत्नी के नाम पर सिलीगुड़ी में 9.2 डिसमिल जमीन खरीदे जाने की जानकारी दी गई है। इस जमीन की कीमत कई करोड़ रुपये आंकी गई है। रिपोर्ट के अनुसार विजिलेंस ने उनके चार ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया था।
गौतम कुमार : होटल और चाय बागान में निवेश की जानकारी
किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के मामले में गंगटोक में होटल और सिलीगुड़ी के मिरिक क्षेत्र में चाय बागान तथा बंगले से जुड़े निवेश की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में उनकी करीब 80 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा होने की बात कही गई है। इन संपत्तियों के स्वामित्व और स्रोत से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
अमरेंद्र कुमार : पटना और सिलीगुड़ी की संपत्तियां
सुपौल के जिला अवर निबंधक अमरेंद्र कुमार के ठिकानों पर 6 मई को हुई छापेमारी में पटना की दीघा-आशियाना रोड और सिलीगुड़ी में जमीन तथा फ्लैट से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पत्नी नीता कुमारी के नाम पर सिलीगुड़ी में वर्ष 2025 और 2026 में खरीदी गई 25 कट्ठा जमीन की बाजार कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई गई। पटना स्थित एक फ्लैट की कीमत लगभग 65 लाख रुपये और उसके इंटीरियर पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी सामने आई। इन आंकड़ों को जांच में बताए गए अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अभिषेक रंजन: कई शहरों में संपत्तियों की जांच
किशनगंज नगर थाना में इंस्पेक्टर अभिषेक रंजन के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने 14 अप्रैल को छापेमारी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान आय से अधिक और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े लगभग 55 करोड़ रुपये के दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई। जांच में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, पटना और छपरा में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का उल्लेख किया गया। इनमें कुछ संपत्तियां रिश्तेदारों के नाम पर होने की बात भी कही गई। दिल्ली में कई फ्लैट और ट्रकों के स्वामित्व से जुड़े पहलुओं की भी जांच का जिक्र है।
राजेश्वरी पांडे : बिहार और वाराणसी में संपत्ति के दस्तावेज
गोपालगंज में अपर जिला दंडाधिकारी के पद पर तैनात राजेश्वरी पांडे के मामले में भी आय से अधिक संपत्ति की जांच के तहत स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने 10 अक्टूबर को छापेमारी की थी। रिपोर्ट के अनुसार तलाशी के दौरान बिहार और वाराणसी में जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले। परिवार के सदस्यों के नाम पर पटना, वाराणसी और रोहतास में 12 प्लॉट होने की जानकारी भी दी गई है, जिनकी शुरुआती अनुमानित कीमत करीब 1.32 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि इन संपत्तियों के स्वामित्व और आय के स्रोत की पुष्टि जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
दूसरे मामलों में भी निवेश के दस्तावेज मिलने का दावा
रिपोर्ट में कुछ अन्य अधिकारियों के मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें संपत्ति और वित्तीय निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई है।
- आनंद कुमार विभूति : दरभंगा के बहादुरपुर में बीडीओ के रूप में तैनात रहे आनंद कुमार विभूति के मामले में उनकी पत्नी के नाम पर दानापुर के आशोपुर में करीब 30 लाख रुपये के फ्लैट और म्यूचुअल फंड में लगभग 70 लाख रुपये के निवेश की जानकारी दी गई।
- अरविंद कुमार चौधरी : रोहतास प्रमंडल के लघु सिंचाई विभाग में कार्यपालक अभियंता के ठिकानों पर 30 जुलाई को हुई छापेमारी में दानापुर के दो फ्लैटों के दस्तावेज मिलने की बात कही गई। इनकी बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई। तलाशी में सोने, बैंक पासबुक, म्यूचुअल फंड, बीमा पॉलिसियों और एफडी से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख है।
- द्विजेंद्र कुमार मिश्र : बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के कार्यपालक अभियंता को तीन सितंबर को कथित तौर पर 1.04 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई। उनके रूपसपुर स्थित ठिकाने पर तलाशी में करीब एक करोड़ रुपये की जमीन-जायदाद में निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात कही गई।
- अंकेश कुमार गोंड : उत्पाद निरीक्षक के मामले में पीपीएफ और म्यूचुअल फंड में लगभग 47.50 लाख रुपये के निवेश का उल्लेख किया गया है।
- पवन कुमार : अधीक्षण अभियंता के परिवार के चार पीपीएफ खातों और दो एफडी में कुल 29.48 लाख रुपये के निवेश की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
अब सिर्फ जमीन नहीं, वित्तीय निवेश भी जांच के दायरे में
इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि आय से अधिक संपत्ति की जांच में केवल जमीन और मकानों के दस्तावेज ही नहीं, बल्कि बैंक खाते, सावधि जमा, म्यूचुअल फंड, पीपीएफ और बीमा पॉलिसियों जैसे वित्तीय निवेश भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करती हैं कि संबंधित व्यक्ति की ज्ञात आय और उसके निवेश तथा संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। संपत्ति किसके नाम पर है, रकम कहां से आई और खरीद कब हुई—ये सभी पहलू जांच का हिस्सा है।




