पटना, 26 अक्टूबर 2026 : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य की पांच प्रमुख सड़क परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में शामिल करते हुए मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इनके तहत कई प्रमुख मार्गों को फोरलेन बनाने और मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण करने की योजना है। इन परियोजनाओं से बिहार के अलग-अलग जिलों के बीच आवागमन आसान होने, यातायात का दबाव कम करने और माल ढुलाई को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। मशरख-चकिया-भिट्ठा मोड़ सड़क परियोजना को खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे अयोध्या और जनकपुर के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

बिहार की 5 बड़ी सड़क परियोजनाएं

1. मशरख-चकिया-भिट्ठा मोड़ सड़क

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 146 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना पर लगभग 8,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके निर्माण से कई क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने और अयोध्या से जनकपुर जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा काफी सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

2. अरवल-बिहारशरीफ सड़क

करीब 89 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को फोरलेन बनाने के लिए लगभग 3,300 करोड़ रुपये की लागत बताई गई है। सड़क चौड़ी होने से अंतर-जिला यातायात और परिवहन को सहूलियत मिल सकती है।

3. नौबतपुर-हरिहरगंज सड़क

इस परियोजना के तहत करीब 88 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण और चौड़ीकरण पर लगभग 2,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे संबंधित इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने में काफी मदद मिल सकती है।

4. छपवा-बेतिया मार्ग

करीब 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को फोरलेन बनाने के लिए 1,700 करोड़ रुपये की राशि बताई गई है। इससे पश्चिमी चंपारण और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।

5. बरियापुर-बिशुनपुर-जमुई सड़क

इस मार्ग के चौड़ीकरण को भी मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इसकी लंबाई और परियोजना की अनुमानित लागत का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

बिहार के सड़क नेटवर्क को मिलेगा फायदा

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य के कई इलाकों में यात्रा पहले से आसान हो सकती है। बेहतर सड़कें स्थानीय व्यापार, माल परिवहन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद कर सकती हैं। इसके साथ ही प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच संपर्क बेहतर होने की भी उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं की वास्तविक समयसीमा, निर्माण शुरू होने की तारीख और पूरा होने की अवधि संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट होगी।