पटना, 2 नवंबर 2026 : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 73 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की संशोधित रिपोर्ट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तैयार कर ली है। करीब 568 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा। इस परियोजना से बिहार के आठ जिलों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि बिहार सरकार ने प्रस्तावित चार लेन के एक्सप्रेस-वे को छह लेन बनाने की मांग की है। हालांकि, इस मांग पर अभी अंतिम सहमति नहीं मिली है।
73 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची एक्सप्रेस-वे की लागत
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे की संशोधित परियोजना लागत अब 73 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। NHAI ने नई रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) के पास भेजने की तैयारी की जा रही है। परियोजना की कुल लागत में 45 हजार करोड़ रुपये सड़क निर्माण पर खर्च होने का अनुमान है। वहीं शेष राशि जमीन अधिग्रहण और अन्य कार्यों पर खर्च की जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत प्रस्तावित है। PPPAC की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
बिहार के इन 8 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेस-वे
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित जगदीशपुर से होगी। इसके बाद यह देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा और आगे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। बिहार में इस एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 417 किलोमीटर होगी। यह राज्य के आठ जिलों से होकर गुजरेगा।बिहार के जिन जिलों को इस परियोजना से फायदा मिलने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं:
- पश्चिम चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- सीतामढ़ी
- शिवहर
- मधुबनी
- सुपौल
- अररिया
- किशनगंज
इस सड़क के निर्माण से इन जिलों में आवागमन आसान होने के साथ व्यापार और परिवहन को भी काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बिहार में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए बिहार में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। राज्य के पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, PPPAC से मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण से जुड़े काम में तेजी लाई जाएगी। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को वित्त वर्ष 2026-27 की वार्षिक योजना में शामिल करने पर सहमति दी है। हालांकि, अभी तक निर्माण कार्य शुरू होने की अंतिम तारीख निर्धारित नहीं हुई है। परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए PPPAC की मंजूरी के बाद केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति भी जरूरी होगी।
बिहार सरकार ने की 6 लेन एक्सप्रेस-वे बनाने की मांग
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को लेकर बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के सामने एक अहम मांग रखी है। राज्य सरकार चाहती है कि प्रस्तावित चार लेन के बजाय इस एक्सप्रेस-वे को छह लेन का बनाया जाए। सरकार का मानना है कि भविष्य में वाहनों की संख्या बढ़ने और यातायात के दबाव को देखते हुए छह लेन की सड़क अधिक उपयोगी साबित होगी। इसके लिए बिहार सरकार ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी करने का भी आग्रह किया है। हालांकि, छह लेन बनाने की मांग पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
यूपी, बिहार और बंगाल के बीच आसान होगा सफर
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के निर्माण से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इस परियोजना से पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा बिहार के सीमावर्ती जिलों में व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कब शुरू होगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण?
फिलहाल परियोजना की संशोधित रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन निर्माण शुरू होने की तारीख घोषित नहीं की गई है। अब PPPAC की मंजूरी, केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर आगे का काम निर्भर करेगा। ऐसे में बिहार के लोगों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण की औपचारिक शुरुआत के लिए अभी इंतजार करना होगा।






