नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026 : बिहार के मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें दुलारचंद यादव हत्याकांड में एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चार दिसंबर तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है। इससे पहले सरेंडर की समयसीमा 1 दिसंबर तय किए जाने की बात सामने आई थी, मगर ताजा आदेश में इसे बढ़ाकर 4 दिसंबर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 19 मार्च 2026 के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया है। अदालत ने बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी कर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई जांच पूरी होने के बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत पर क्यों लगाई रोक?
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके खिलाफ मृतक के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या और आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर किस आधार पर देखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के जमानत आदेश को निलंबित किया है। साथ ही अनंत सिंह को निर्धारित समयसीमा में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
4 दिसंबर तक जांच अधिकारी के सामने करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के मुताबिक, अनंत सिंह को 4 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करना होगा। इसके अलावा जांच अधिकारी को चार महीने के भीतर दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच पूरी कर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक, अनंत सिंह की बेटी की शादी को देखते हुए उन्हें सरेंडर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। हालांकि, जमानत पर अंतिम कानूनी फैसला अगली सुनवाई में लिया जाएगा।
बेटी की शादी में व्यस्त अनंत सिंह ने क्या कहा था ?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले अनंत सिंह ने एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने दावा किया था कि घटना के समय उनकी गाड़ी घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर आगे निकल चुकी थी। अनंत सिंह के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को वह खाना खाने के बाद अपने समर्थकों और काफिले के साथ निकले थे। उनका कहना था कि काफिले की कुछ गाड़ियां आगे निकल गई थीं और कुछ पीछे रह गई थीं। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि पीछे विवाद हो गया है। इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों को फोन कर घटना की जानकारी लेने की कोशिश की। अनंत सिंह ने खुद को मामले में फंसाए जाने का आरोप भी लगाया था। ये उनके अपने दावे हैं, जिनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है।
विधानसभा सचिवालय ने भी जारी किया नोटिस
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार विधानसभा सचिवालय ने भी उन्हें नोटिस जारी किया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर सचिव संजय कुमार सिंह की ओर से यह नोटिस भेजा गया है। इसमें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों पर अनंत सिंह से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। बताया गया है कि अनंत सिंह को सोमवार को यह नोटिस मिल गया था। अब उनके जवाब के आधार पर विधानसभा सचिवालय आगे की कार्रवाई करेगा।
24 अक्टूबर को जदयू ने छह साल के लिए किया था निष्कासित
अनंत सिंह को 24 अक्टूबर को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उन पर पार्टी लाइन से अलग जाकर काम करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया था। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की थी। इसके साथ ही 10 पन्नों के दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य भी सौंपे गए थे। इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस
जदयू से निष्कासन के बाद नीलम देवी को एक और प्रशासनिक झटका लगा था। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने पटना के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया था। इसमें 25 नवंबर 2026 तक आवास खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा उनसे राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया था।
अनंत सिंह पर दर्ज हैं 67 आपराधिक मामले
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का मुद्दा भी उठा था। याचिकाकर्ता के वकीलों की ओर से अदालत में बताया गया कि अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ दर्ज कुल 67 आपराधिक मामलों का जिक्र किया गया था। हालांकि अलग-अलग मामलों की कानूनी स्थिति अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के फैसले पर विचार करते समय आपराधिक इतिहास और आरोपों की गंभीरता को महत्वपूर्ण माना।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड ?
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में हुई थी। उस समय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार चल रहा था।अनंत सिंह उस समय जदयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे थे। वहीं पूर्व राजद नेता दुलारचंद यादव जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान ही दोनों पक्षों के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए। इसी दौरान हिंसक झड़प हुई, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, जेल में रहते हुए उन्होंने मोकामा विधानसभा चुनाव जीत लिया था। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन्हें 4 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई और पुलिस की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं।






