पटना, 3 नवंबर 2026 : बिहार में पंचायत आम चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले राज्य में पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत गांवों और टोलों की सीमाएं सरकारी राजस्व नक्शे के आधार पर तय होंगी। खास बात यह है कि इस बार सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि जमीन पर जाकर भी सीमाओं का सत्यापन किया जाएगा। ऐसे में यह प्रक्रिया तय करेगी कि आपका गांव किस पंचायत के अंतर्गत आएगा।
सरकारी नक्शे के आधार पर होगा पंचायतों का परिसीमन
बिहार में पंचायतों की नई सीमाएं तय करने के लिए राजस्व ग्राम के सरकारी नक्शों को आधार बनाया जाएगा। सरकारी अभिलेखों में दर्ज गांवों और उनकी चौहद्दी के अनुसार परिसीमन का प्रारूप तैयार होगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कौन-सा गांव, टोला या इलाका किस ग्राम पंचायत के अंतर्गत आएगा। प्रशासन का उद्देश्य पंचायतों की सीमाओं को सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक भौगोलिक स्थिति के अनुरूप तय करना है।
गांवों में जाकर नक्शे का सत्यापन करेंगे अमीन
परिसीमन की प्रक्रिया में राजस्व विभाग के अमीन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकारी नक्शे के आधार पर प्रारंभिक प्रारूप तैयार होने के बाद अमीन संबंधित गांवों और इलाकों में पहुंचेंगे। वे मौके पर जाकर नक्शे में दर्ज सीमाओं का वास्तविक स्थिति से मिलान करेंगे। अगर सरकारी नक्शे और जमीन पर मौजूद स्थिति में अंतर मिलता है, तो संबंधित मामले की दोबारा जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नक्शे में सुधार कर संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा।
गड़बड़ी मिलने पर बनेगा संशोधित नक्शा
स्थल सत्यापन के दौरान किसी गांव, टोले या इलाके की सीमा में त्रुटि मिलने पर संबंधित अधिकारियों को उसकी जांच करनी होगी। अगर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सीमा और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो जरूरी सुधार किए जाएंगे। इसके बाद संशोधित नक्शा तैयार किया जाएगा। हालांकि प्रशासन की पूरी कोशिश है कि पंचायतों की सीमाओं को अंतिम रूप देने से पहले सभी तरह की तकनीकी और भौगोलिक गड़बड़ियों को अच्छी तरह से दूर कर लिया जाए।
पंचायतों की नई चौहद्दी और दस्तावेज पोर्टल पर होंगे अपलोड
परिसीमन का काम पूरा होने के बाद पंचायतों की नई चौहद्दी का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके साथ संबंधित नक्शे और जरूरी दस्तावेज निर्धारित सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की जिम्मेदारी अहम होगी। उन्हें नक्शों और दस्तावेजों की जांच करने के साथ पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी का मिलान भी करना होगा।
BDO खुद करेंगे नक्शे और रिकॉर्ड की जांच
छपरा में जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने समाहरणालय सभागार में परिसीमन की तैयारियों को लेकर एक समीक्षा बैठक की है। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी भी शामिल हुए। डीएम ने परिसीमन से जुड़े नौ बिंदुओं पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित बीडीओ को नक्शों और दस्तावेजों का भौतिक एवं अभिलेखीय सत्यापन खुद करने को कहा। प्रशासन ने इस काम में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
पंचायत परिसीमन क्यों है जरूरी ?
पंचायत परिसीमन का सीधा संबंध गांवों की प्रशासनिक सीमाओं और चुनावी व्यवस्था से है। इसके जरिए तय किया जाता है कि कौन-सा गांव या टोला किस पंचायत के अंतर्गत आएगा। इसका असर स्थानीय पंचायत व्यवस्था, मतदाताओं की प्रशासनिक पहचान और चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अगर किसी गांव या टोले की सीमा गलत दर्ज होती है, तो भविष्य में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से इस बार सरकारी राजस्व नक्शों के साथ जमीनी सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।
Bihar Panchayat Election 2026: अब आगे क्या होगा ?
बिहार पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा करना प्रशासन के लिए अहम है। इसके तहत सबसे पहले सरकारी राजस्व नक्शों से प्रारंभिक प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद अमीन गांवों में जाकर सीमाओं का सत्यापन करेंगे। गड़बड़ी मिलने पर नक्शों में जरूरी संशोधन होगा। अंत में बीडीओ संबंधित दस्तावेजों और नक्शों की जांच कर उन्हें निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पंचायतों की नई चौहद्दी को अंतिम रूप दिया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिसीमन के बाद आपके गांव की पंचायत की सीमा में कोई बदलाव होगा या नहीं। इसका पता सरकारी सत्यापन और अंतिम परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।






