पटना, 3 नवंबर 2026 : बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को एक ही जगह पर देखने का मौका जल्द मिलने वाला है। पटना में 15 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा बिहार गौरव पार्क अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। पार्क का निर्माण कार्य 21 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद 22 नवंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों इसका उद्घाटन भी होने की संभावना है। हालांकि उद्घाटन की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। करीब नौ एकड़ में फैले इस पार्क का निर्माण गंगा पथ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समाधि स्थल के बीच कराया जा रहा है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) इस परियोजना को पूरा करा रहा है। अब तक करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

21 नवंबर तक पूरा होगा निर्माण, 22 को उद्घाटन की तैयारी

बिहार गौरव पार्क का निर्माण अंतिम चरण में है। पार्क में पेंटिंग, फिनिशिंग और अन्य बचे हुए काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। निर्माण एजेंसी ने 21 नवंबर तक सभी जरूरी काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद 22 नवंबर को पार्क का उद्घाटन संभावित है। उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि,इस संबंध में अंतिम कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हुआ था निर्माण

बिहार गौरव पार्क के निर्माण के दौरान गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से परिसर में पानी पहुंच गया था। इसके कारण कुछ समय के लिए निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। भविष्य में ऐसी स्थिति से पार्क को सुरक्षित रखने के लिए इसके चारों ओर रिटेनिंग स्ट्रक्चर बनाया जा रहा है। बुडको के एमडी सह नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अनिमेष कुमार पराशर के मुताबिक, इस संरचना से गंगा का जलस्तर उच्च बाढ़ स्तर तक पहुंचने के बाद भी पार्क परिसर में पानी आने से बचाव किया जा सकेगा।

कबाड़ से तैयार हुईं बिहार की विरासत दर्शाती 38 कलाकृतियां

बिहार गौरव पार्क की सबसे खास विशेषता इसकी 'वेस्ट टू वंडर' थीम है। यहां कबाड़ और स्क्रैप से बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाली कलाकृतियां तैयार की गई हैं। दिल्ली से लाए गए स्क्रैप का इस्तेमाल कर पार्क में 38 स्ट्रक्चर और कलाकृतियां बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य बेकार सामग्री को आकर्षक कलात्मक संरचनाओं में बदलकर राज्य की विरासत को दिखाना है।

मधुबनी, मंजूषा और टिकुली कला की दिखेगी झलक

पार्क में बिहार की प्रसिद्ध लोककलाओं को भी खास जगह दी गई है। यहां मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा कला, टिकुली कला और सुजनी कला को कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा बिहार की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े 34 अन्य स्मारकों और मूर्तियों की प्रतिकृतियां भी तैयार की गई हैं। पर्यटक यहां एक ही परिसर में राज्य की विभिन्न लोककलाओं और ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देख सकेंगे।

चाणक्य, सम्राट अशोक और दशरथ मांझी की दिखेगी विरासत

बिहार गौरव पार्क के बीच में आधुनिक ओपन एयर थिएटर (OAT) बनाया जा रहा है। इसके चारों ओर सीढ़ीनुमा बैठने की व्यवस्था होगी, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन किए जा सकेंगे। थिएटर के आसपास बिहार की महान विभूतियों से जुड़ी संरचनाएं और प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। इनमें चाणक्य, सम्राट अशोक, दशरथ मांझी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, आर्यभट्ट, वीर बाबू कुंवर सिंह, रामधारी सिंह दिनकर और विद्यापति शामिल हैं।

मुख्य प्रवेश द्वार पर दिखेगी देश और बिहार की पहचान

पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार भी विशेष थीम पर तैयार किया जा रहा है। इसे 'बिहार गौरव पार्क द्वार' नाम दिया गया है। इस द्वार पर अशोक स्तंभ, लाल किला, संसद भवन और देश-दुनिया में पहचान रखने वाली अन्य प्रमुख धरोहरों की आकृतियां उकेरी जाएंगी। इससे पार्क में प्रवेश करते ही पर्यटकों को भारत और बिहार की ऐतिहासिक विरासत की झलक मिलेगी।

पार्किंग, फूड लाउंज और शौचालय जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी

बिहार गौरव पार्क में केवल कलाकृतियां और ऐतिहासिक संरचनाएं ही नहीं होंगी, बल्कि पर्यटकों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में पार्किंग, शौचालय और प्रशासनिक भवन तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा आगंतुकों के खान-पान और आराम के लिए फूड लाउंज की व्यवस्था भी की जा रही है। निर्माण के अंतिम चरण में इन सभी सुविधाओं को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।

बिहार गौरव पार्क के बाद बनेगा जेपी पार्क

बिहार गौरव पार्क का निर्माण पूरा होने के बाद इसी परिसर के आगे जेपी पार्क विकसित करने की योजना है। इससे गंगा पथ के आसपास पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाओं को और विस्तार मिल सकता है। फिलहाल बुडको का लक्ष्य 21 नवंबर तक बिहार गौरव पार्क का निर्माण पूरा करना है। अगर निर्धारित समय पर काम पूरा हो जाता है, तो 22 नवंबर को इसके उद्घाटन का रास्ता साफ हो सकता है। इसके शुरू होने से पटना को एक नया पर्यटन स्थल मिलने की उम्मीद है।