नई दिल्ली | 17 जुलाई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अप्रैल के बाद यह ब्रेंट क्रूड की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त मानी जा रही है।
तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह
रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की, जबकि इससे पहले ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल के पास एक ऑयल टैंकर पर हमले की खबर सामने आई थी। इसके अलावा यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर और हमले होते हैं तो यमन के हूती विद्रोही Bab el-Mandeb Strait में जहाजों की आवाजाही प्रभावित कर सकते हैं। यह मार्ग लाल सागर और वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर
बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। यदि यहां तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी आशंका ने निवेशकों और ट्रेडर्स की चिंता बढ़ा दी है।
पेट्रोल-डीजल पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका और यूरोप में रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के साथ ही रूस से ईंधन निर्यात में कमी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। यूक्रेन संघर्ष के कारण रूस ने कुछ डीजल शिपमेंट पर भी पाबंदियां लगाई हैं।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनी चुनौती
सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण Strait of Hormuz से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी हुई है। कुछ कंपनियां ओमान के तट के पास वैकल्पिक Ship-to-Ship Transfer का सहारा ले रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और तेज हो सकती है।




