पटना | 1 अगस्त
बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के विधान परिषद (MLC) पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान पार्षद देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि रिक्त होने वाली इस सीट पर अब दीपक प्रकाश को मनोनीत किया जा सकता है। दीपक प्रकाश का मंत्री पद यथावत रह जाएगा। इस तरह मंत्री बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी सुरक्षित करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा की सियासी रणनीति कामयाब हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा सांसद हैं और उनकी पत्नी स्नेहलता विधायक जबकि बेटा दीपक प्रकाश के एमएलसी बन जाने से उनकी मंत्री की कुर्सी बच जाएगी।
मंत्री पद बचाने की कवायद तेज
दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे अभी विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। भारतीय संविधान के अनुसार, मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी की जा रही है।
BJP MLC के इस्तीफे से खुला रास्ता
राज्यपाल कोटे से मनोनीत भाजपा MLC देवेश कुमार ने शुक्रवार को विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक था। अब इस्तीफा स्वीकार होने के बाद रिक्त होने वाली सीट पर नए सदस्य के मनोनयन की प्रक्रिया शुरू होगी।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में उनके मंत्री पद की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है। हालांकि इस बीच राज्य सरकार द्वारा उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आधिकारिक बयान का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) या सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। देवेश कुमार ने भी अपने इस्तीफे के कारणों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि दीपक प्रकाश ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मनोनयन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो दीपक प्रकाश का मंत्री पद संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो जाएगा।




