पटना | 04 अगस्त 2026

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने चुनाव परिणाम को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहते तो बांकीपुर का नतीजा अलग ही होता। उन्होंने कहा कि जनता के बीच यह गलत संदेश गया कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। और परिणाम सबके सामने है।

'जनता में गलत संदेश गया'

मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि आम लोगों के बीच भ्रम फैल गया था कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा बिल्कुल नहीं था। बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने स्वयं मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, उन्हें किसी ने हटाया नहीं था। लेकिन जनता में इसको लेकर भ्रम पैदा हो गया है, जिससे लोगों में नाराज़गी देखने को मिली।

'नीतीश रहते तो परिणाम अलग होता'

जदयू विधायक ने दावा किया कि यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहते तो बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम अलग हो सकता था। उनके मुताबिक सत्ता परिवर्तन को लेकर फैली गलतफहमी का सीधा असर मतदान पर पड़ा।

'जनता ही लोकतंत्र की असली मालिक'

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है। उन्होंने कहा कि जिस उम्मीदवार को जनता ने वोट दिया, वही चुनाव जीत गया। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और वही अंतिम निर्णय करती है।

नीतीश कुमार के समर्थन में दिया बड़ा बयान

अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार जहां भी रहेंगे और जिस भूमिका में रहेंगे, जदयू के सभी नेता और कार्यकर्ता पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह से अपने नेता के नेतृत्व में एकजुट है।

RJD पर भी किया तीखा हमला

बांकीपुर उपचुनाव में राजद के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए अनंत सिंह ने विपक्षी दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि जनता ने राजद को पूरी तरह नकार दिया है और पार्टी का प्रदर्शन उसकी राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।

बांकीपुर उपचुनाव के बाद तेज हुई सियासी बहस

बांकीपुर उपचुनाव में आए नतीजों के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी लगातार तेज हो रही है। विभिन्न दल अपने-अपने तरीके से परिणामों की व्याख्या कर रहे हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव के नतीजे आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अब इस पर विचार किया जाना चाहिए कि आखिर ऐसा परिणाम कैसे आया।