पटना, 22 अगस्त 2026 : पटना में रिहायशी मकानों और परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। निगम की जांच में 26,745 ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई है, जहां आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। इन संपत्तियों के मालिकों को नोटिस भेजकर दस्तावेज और अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। नोटिस के बाद अंचल कार्यालयों में लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए निगम ने सुनवाई की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब पटना नगर निगम के सभी छह अंचलों में रोज जनसुनवाई होगी। संबंधित अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी मामलों की सुनवाई करेंगे और संपत्ति मालिकों का पक्ष एवं दस्तावेज देखेंगे।

नोटिस पाने वालों को अपना पक्ष रखने का मौका

नगर निगम की ओर से नोटिस मिलने के बाद संपत्ति मालिकों को यह बताना होगा कि उनकी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। साथ ही उन्हें संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और व्यावसायिक गतिविधि से संबंधित जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी। नगर निगम प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी मामलों की नियमित सुनवाई की जाए और नियमों के अनुसार उनका निष्पादन किया जाए। सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने का भी निर्देश दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने उठाए टैक्स से जुड़े सवाल

नोटिस मिलने के बाद कई स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वार्ड 50 के इंद्रनाथ मिश्रा ने कहा कि उनका कोल्ड स्टोरेज वर्ष 1951 से चल रहा था। बाद में इसे गोदाम में परिवर्तित किया गया और वे कई वर्षों से कमर्शियल टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी संपत्ति में वास्तव में व्यावसायिक गतिविधि चल रही है और टैक्स नहीं दिया जा रहा है, तो ऐसे मामलों में नोटिस दिया जाना चाहिए। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी ने सवाल उठाया कि यदि नगर निगम किसी गतिविधि को नियमों के विपरीत मानता है, तो उसके लिए स्पष्ट नियम और प्रक्रिया बताई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि वर्षों से संपत्ति पर अधिक टैक्स लिया गया है, तो इस स्थिति में पुराने टैक्स को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

'मकान अवैध है तो 20 साल का टैक्स वापस करें'

वार्ड 45 के पंकज कुमार ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें भी नोटिस मिला है और वे हर साल करीब 10 हजार रुपये टैक्स जमा करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि नगर निगम अब उनकी संपत्ति को अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल के दायरे में मान रहा है, तो पिछले 20 वर्षों में जमा किए गए कमर्शियल टैक्स का क्या होगा।

रिहायशी इलाकों में इन गतिविधियों की पहचान

नगर निगम की जांच में रिहायशी परिसरों में कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। इनमें दुकानें, व्यावसायिक कार्यालय, पार्किंग, मैरिज हॉल, अस्पताल, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, स्कूल, गोदाम, गेस्ट हाउस व रेस्टोरेंट शामिल हैं। निगम के आंकड़ों के अनुसार, आवासीय इलाकों में 194 गेस्ट हाउस, 154 छोटे उद्योग और 106 होटल भी चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 15 कॉलेज, 39 हेल्थ क्लब, 70 नर्सिंग होम और 37 रेस्टोरेंट भी सूची में शामिल हैं।

पटना में 47.55% क्षेत्र आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित

बिहार गजट में प्रकाशित पटना के आधिकारिक भूमि-उपयोग आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र के कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 49.56 वर्ग किलोमीटर यानी 47.55% हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है। वहीं वाणिज्यिक उपयोग के लिए 4.65 वर्ग किलोमीटर यानी 4.46% और मिश्रित उपयोग के लिए 3.52 वर्ग किलोमीटर यानी 3.37% क्षेत्र निर्धारित है। इसके बावजूद कई रिहायशी कॉलोनियों में दुकानों, कार्यालयों और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से शहर की यातायात, पार्किंग और शहरी व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

रिहायशी जोन में किन गतिविधियों की अनुमति ?

पटना के रेजिडेंशियल जोन-1, रेजिडेंशियल जोन-2 और अर्बन सेंटर जोन में मुख्य रूप से आवासीय गतिविधियों की अनुमति है। इनमें मकान, हॉस्टल, बोर्डिंग-लॉजिंग हाउस, नाइट शेल्टर और इंटीग्रेटेड टाउनशिप जैसी गतिविधियां शामिल हैं। कुछ परिस्थितियों में बैंक और बेकरी-कन्फेक्शनरी जैसी गतिविधियों को भी अनुमति मिल सकती है। वहीं कॉलेज जैसी गतिविधियों के लिए निर्धारित नियमों और विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।

अब आगे क्या होगा ?

नगर निगम नोटिस पाने वाले संपत्ति मालिकों की ओर से दिए गए जवाब और दस्तावेजों की जांच करेगा। इसके बाद संबंधित संपत्ति में संचालित गतिविधि की वैधता और नियमों के अनुपालन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि मामलों की नियमित सुनवाई कर नियमों के अनुसार उनका निष्पादन किया जाए। निगम का लक्ष्य रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाना है।