गोपालगंज, 20 अगस्त 2026 : करीब सात साल पुराने जानलेवा फायरिंग मामले में कुचायकोट से जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय समेत तीन आरोपियों के खिलाफ अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में पप्पू पांडेय के बड़े भाई सतीश पांडेय और उनके भतीजे मुकेश पांडेय भी आरोपी हैं। आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मुकदमा साक्ष्य के चरण में आगे बढ़ेगा। इस तरह विधायक पप्पू पांडेय की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

2019 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी

मीरगंज थाना क्षेत्र के नयागांव तुलसिया सिंह टोला निवासी फूलमती कुंवर ने वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे अभिमन्यु तिवारी पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की गई। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ के साथ उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में हुई सुनवाई

बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 सह एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। न्यायाधीश रजेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने पप्पू पांडेय, सतीश पांडेय और मुकेश पांडेय के खिलाफ आरोप तय किए। आरोप तय होने के बाद अब अभियोजन पक्ष अदालत के सामने अपने गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करेगा। गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष को उनसे जिरह का मौका मिलेगा।

अब आगे क्या होगा ?

इस मामले की अगली प्रक्रिया में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य देखने के बाद अदालत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। गौर करने वाली बात है कि आरोप तय होना दोष साबित होना नहीं है। अदालत के अंतिम फैसले तक सभी आरोपियों को कानूनन निर्दोष माना जाता है। दोष या निर्दोष होने का फैसला सुनवाई पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर अदालत करेगी।

पप्पू पांडेय से जुड़े अन्य मामलों से अलग है यह केस

पप्पू पांडेय से जुड़े अन्य चर्चित मामलों की वजह से भी यह मामला चर्चा में रहा है। हालांकि, वर्ष 2020 का रूपनचक ट्रिपल मर्डर मामला और वर्ष 2026 का जमीन विवाद इस फायरिंग केस से अलग हैं। प्रत्येक मामले की अपनी अलग प्राथमिकी, जांच और न्यायिक प्रक्रिया है। वहीं, 2026 में सामने आए जमीन विवाद मामले की जांच सीआईडी को सौंपे जाने की बात सामने आई थी। उस मामले में विधायक पक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश बताया है।

सात साल पुराने मामले में अब साक्ष्यों पर नजर

करीब सात साल बाद फायरिंग मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने से मुकदमा अब अगले चरण में पहुंच गया है। अब अदालत में होने वाली गवाहों की गवाही और पेश किए जाने वाले साक्ष्य इस केस की दिशा तय करने में अहम होंगे।