पटना | 28 जुलाई 2026: बिहार जल्द ही देश के प्रमुख रेयर अर्थ एलिमेंट (Rare Earth Elements) उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है। राज्य के सात जिलों में दुर्लभ खनिजों के भंडार मिलने के बाद सरकार ने इनके खनन की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का अनुमान है कि परियोजना शुरू होने के बाद राज्य को करीब ₹3,000 करोड़ का राजस्व मिलेगा, जबकि 40 हजार से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
14 खनन ब्लॉक चिन्हित, जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 14 खनन ब्लॉक चिन्हित किए जा चुके हैं। विभाग केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर खनन प्रक्रिया जल्द शुरू करने की तैयारी कर रहा है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना बिहार के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
40 हजार से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार
खनन परियोजना के शुरू होने से राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अनुमान है कि 40 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसमें इंजीनियर, भू-वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल स्टाफ और खनन कार्य से जुड़े श्रमिकों की मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय कारोबार और अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
बिहार के उद्योगों को होगा फायदा
सरकार का कहना है कि राज्य में उपलब्ध होने वाले इन खनिजों से करीब 300 उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। अभी कई उद्योगों को कच्चा माल दूसरे राज्यों से मंगाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर खनिज उपलब्ध होने से परिवहन लागत कम होगी और उत्पादन खर्च में भी कमी आने की संभावना है। इससे बैटरी, इस्पात और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है।
रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए अहम
रेयर अर्थ एलिमेंट आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनका उपयोग परमाणु ऊर्जा, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, ड्रोन, अंतरिक्ष तकनीक, फाइटर जेट, पनडुब्बी, नाइट विजन उपकरण, टीवी, डिजिटल कैमरा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लिथियम-आयन बैटरियों के निर्माण में किया जाता है।
किन जिलों में मिले हैं दुर्लभ खनिज?
राज्य के सात जिलों में अलग-अलग प्रकार के खनिजों की पहचान की गई है—
- गया: निकल, क्रोमियम, पैलेडियम और प्लैटिनम ग्रुप के तत्व
- रोहतास: ग्लोकोनाइट और पाइराइट
- बांका: तांबा, सीसा, कोबाल्ट और एल्युमिनियम
- भागलपुर: लैंथेनम, सीरियम, टाइटेनियम और क्रोमाइट
- नवादा: वैनेडियम और इल्मेनाइट
- जमुई: मैग्नेटाइट और लौह अयस्क
- जहानाबाद: मैग्नेटाइट और लौह अयस्क
चीन पर निर्भरता घटाने में मिल सकती है मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में रेयर अर्थ एलिमेंट के भंडार मिलने से भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। वर्तमान में दुनिया के अधिकांश रेयर अर्थ खनिजों का उत्पादन चीन में होता है। ऐसे में देश के भीतर इन खनिजों का उत्पादन बढ़ने से रक्षा, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है।
खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद ने कहा कि बिहार में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार की पहचान की गई है। सरकार ने 14 ब्लॉक चिन्हित कर लिए हैं और केंद्र सरकार के सहयोग से जल्द खनन प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परियोजना राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए मील का पत्थर साबित होगी।




