पटना: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम समाप्त हो गया। अब सभी राजनीतिक दलों का फोकस बूथ प्रबंधन और मतदाताओं तक अंतिम समय में पहुंचने की रणनीति पर है। इस हाई-प्रोफाइल चुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

आखिरी दिन सभी दलों ने झोंकी ताकत

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन भाजपा और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए रोड शो निकाले। वहीं, जन सुराज ने घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं से समर्थन मांगा। राजधानी पटना में पूरे दिन चुनावी गतिविधियां तेज रहीं और सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।

मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। मतदाताओं और चुनाव कर्मियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

त्रिकोणीय मुकाबले पर सबकी नजर

इस बार बांकीपुर सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राजद ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

क्यों खास है यह उपचुनाव?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है। इसके नतीजों को बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा और प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। यही कारण है कि भाजपा, राजद और जन सुराज तीनों ने प्रचार अभियान में अपनी पूरी ताकत लगा दी।

भाजपा के लिए प्रतिष्ठा, विपक्ष के लिए अवसर

बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। पूर्व मंत्री नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहती है, जबकि राजद इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ जनसमर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर इस चुनाव के जरिए जन सुराज को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं।

अब 3 अगस्त पर टिकी नजर

प्रचार समाप्त होने के बाद अब सभी दलों की नजर बूथ स्तर की रणनीति और अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर रहेगी। 30 जुलाई को होने वाले मतदान के बाद 3 अगस्त को मतगणना होगी, जिसके साथ यह साफ हो जाएगा कि भाजपा अपना गढ़ बचा पाती है या राजद अथवा जन सुराज कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने में सफल होते हैं।