पटना, 21 अगस्त 2021 : सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की दिशा में बिहार सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों को महंगी निजी कोचिंग पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें स्कूल स्तर पर ही बेहतर शिक्षा, मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके।
मॉडल स्कूलों में JEE-NEET की मुफ्त कोचिंग
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि बिहार के मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था को हर हाल में प्रभावी बनाया जाए। इसका फायदा खास तौर पर उन छात्रों को मिल सकता है, जो प्रतिभाशाली हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते।सरकार की योजना है कि छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप पढ़ाई के साथ-साथ जरूरी मार्गदर्शन और शैक्षणिक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं।
डिजिटल पढ़ाई को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के 24x7 इंटरैक्टिव डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण Study Material और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों को घर बैठे बेहतर शैक्षणिक संसाधन मिल सकेंगे।
सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए बड़ा अवसर
सरकार की कोशिश सिर्फ बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम हासिल करने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को भविष्य की National Level Competitive Exams के लिए तैयार करना भी है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू होती है, तो बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों को JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर मिल सकता है। खासकर ऐसे छात्रों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण होगी, जिनके परिवार महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से घोषित इन व्यवस्थाओं को स्कूलों में किस तरह लागू किया जाता है और इसका लाभ कितने छात्रों तक पहुंचता है।




