पटना, 3 अगस्त 2026 :

बिहार की सबसे चर्चित सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी के करीब तीन दशक पुराने राजनीतिक गढ़ को ध्वस्त कर दिया। 31 राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 18,953 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ प्रशांत किशोर ने न केवल अपनी पहली बड़ी चुनावी सफलता हासिल की, बल्कि बिहार की राजनीति में जन सुराज को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में भी स्थापित कर दिया।

फाइनल रिजल्ट

उम्मीदवार पार्टी वोट

प्रशांत किशोर - जन सुराज पार्टी 63,203

नीरज कुमार - भारतीय जनता पार्टी 44,250

रेखा कुमारी - राष्ट्रीय जनता दल 14,085

मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव -प्रगतिशील जनता पार्टी - 950

तनवीर आलम— राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी — 847

पूरे चुनाव में बनाए रखी बढ़त

मतगणना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि 31 में से किसी भी राउंड में बीजेपी प्रशांत किशोर से आगे नहीं निकल सकी। शुरुआती राउंड से मिली बढ़त लगातार बढ़ती गई और अंतिम राउंड तक कायम रही। इससे स्पष्ट हुआ कि चुनाव के दौरान मतदाताओं का रुझान लगातार जन सुराज के पक्ष में बना रहा।

बीजेपी का 30 साल पुराना गढ़ टूटा

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट पर पार्टी का तीन दशक से अधिक समय तक दबदबा रहा, लेकिन इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने उस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया राजनीतिक इतिहास रच दिया।

जीत के बाद क्या बोले प्रशांत किशोर

जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि "30 साल का गढ़ 30 दिन में ढह गया।" उन्होंने दावा किया कि यह जीत बिहार की जनता के बदलाव के संदेश का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि बिहार में बेहतर नेतृत्व देने के लिए मुख्यमंत्री पद पर बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए। सीएम सम्राट चौधरी को बदलने की सलाह दी है।

राजद तीसरे स्थान पर सिमटी

इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को बड़ा झटका लगा। पार्टी उम्मीदवार रेखा कुमारी केवल 14,085 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहीं। परिणाम ने साफ संकेत दिया कि मुकाबला मुख्य रूप से जन सुराज और बीजेपी के बीच रहा।

बिहार की राजनीति में नए समीकरण

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। प्रशांत किशोर की जीत ने आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीतियों और विपक्ष की राजनीति पर नई बहस छेड़ दी है।