नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। सोशल मीडिया आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने, मनोरंजन और जानकारी हासिल करने में इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। हालांकि, सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा या असंतुलित इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। खासकर बच्चों और किशोरों में लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल, सोशल तुलना और साइबरबुलिंग चिंता का कारण बन सकते हैं।
नींद और मूड पर पड़ सकता है असर
सोशल मीडिया पर लंबे समय तक समय बिताने से सोने का समय प्रभावित हो सकता है। रात में लगातार फोन चलाने और नोटिफिकेशन चेक करने की आदत नींद में बाधा डाल सकती है। नींद पूरी नहीं होने पर चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है।
दूसरों से तुलना बढ़ा सकती है तनाव
सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी जिंदगी के अच्छे और आकर्षक पल ही साझा करते हैं। ऐसे कंटेंट को देखकर कुछ लोग अपनी जिंदगी, शरीर, पढ़ाई, नौकरी या रिश्तों की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। लगातार तुलना आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है और तनाव या बेचैनी बढ़ा सकती है।
साइबरबुलिंग भी बड़ी समस्या
ऑनलाइन ट्रोलिंग, अपमानजनक कमेंट, धमकी या साइबरबुलिंग का मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है। बच्चों और किशोरों में ऐसे अनुभव भावनात्मक परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार में अचानक बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे रखें संतुलित?
सोशल मीडिया पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। इसके बजाय स्क्रीन टाइम को सीमित करना, सोने से पहले फोन से दूरी रखना और नकारात्मक कंटेंट को म्यूट या अनफॉलो करना मददगार हो सकता है। परिवार और दोस्तों के साथ आमने-सामने समय बिताना भी जरूरी है।
अगर सोशल मीडिया के कारण लगातार तनाव, उदासी, नींद की समस्या या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी लगातार या गंभीर परेशानी होने पर योग्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।




