नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026

आज के डिजिटल दौर में लोग पहले से कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। परिवार साथ होता है, मोबाइल में सैकड़ों कॉन्टैक्ट और सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स होते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग भीतर से अकेलापन महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अकेलापन केवल अकेले रहने से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव की कमी से भी पैदा होता है।

कोच, हीलर और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, किसी व्यक्ति के आसपास कितने लोग हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह अपनी भावनाएं कितनी खुलकर साझा कर पाता है। जब लोग अपनी परेशानियां, डर या मानसिक तनाव अपने करीबी लोगों से भी साझा नहीं कर पाते, तब धीरे-धीरे भीतर खालीपन और अकेलेपन की भावना बढ़ने लगती है।

सोशल मीडिया भी बन सकता है कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक सोशल मीडिया पर दूसरों की खुशहाल और परफेक्ट जिंदगी देखकर कई लोग अपनी तुलना करने लगते हैं। इससे उन्हें अपनी जिंदगी कम बेहतर लगने लगती है, जो तनाव, उदासी और अकेलेपन की भावना को बढ़ा सकता है।

कैसे पाएं अकेलेपन से राहत?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवार और दोस्तों के साथ केवल समय बिताना ही काफी नहीं है, बल्कि उनसे खुलकर बातचीत करना भी जरूरी है। अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति या विशेषज्ञ से साझा करें। साथ ही किताब पढ़ना, संगीत सुनना, योग, ध्यान, गार्डनिंग या कोई नई हॉबी अपनाने जैसी गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एकांत और अकेलापन दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। एकांत आत्मचिंतन का अवसर देता है, जबकि अकेलापन मानसिक तनाव और भावनात्मक परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए रिश्तों में संवाद बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।