89 हजार लोगों के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली: भारत में नींद की कमी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। 2026 में करीब 89 हजार लोगों पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 46 प्रतिशत भारतीयों को रोजाना 6 घंटे से कम नींद मिल रही है। हालांकि 2025 में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत था, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

कितनी नींद ले रहे हैं भारतीय?

सर्वे के मुताबिक केवल 42 प्रतिशत लोगों को 6 से 8 घंटे की नींद मिल रही है। वहीं 23 प्रतिशत लोग 4 से 6 घंटे और 23 प्रतिशत लोग सिर्फ 4 घंटे या उससे कम नींद ले रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

नींद पूरी न होने की सबसे बड़ी वजह

रिपोर्ट के अनुसार 72 प्रतिशत लोगों ने रात में बार-बार वॉशरूम जाने को नींद टूटने की मुख्य वजह बताया। इसके अलावा तनाव, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग, अनियमित दिनचर्या और काम का बढ़ता दबाव भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

कार्यस्थल पर भी दिख रहा असर

Wakefit की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक हर तीन में एक शहरी भारतीय को डर है कि वह अनिद्रा (Insomnia) का शिकार हो सकता है। वहीं करीब 60 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें ऑफिस के दौरान नींद या थकान महसूस होती है, जिससे उनकी उत्पादकता और एकाग्रता प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

डॉक्टरों के अनुसार लगातार कम नींद लेने से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक 6 घंटे से कम नींद लेने से शरीर और मस्तिष्क दोनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

निष्कर्ष

89 हजार लोगों पर आधारित यह सर्वे बताता है कि भारत की बड़ी आबादी अभी भी पर्याप्त नींद नहीं ले पा रही है। विशेषज्ञ बेहतर दिनचर्या, कम स्क्रीन टाइम और नियमित नींद के समय को इस समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं।