रांची, 26 सितंबर 2026 : झारखंड में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज हो रहा है। झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मौजूदा SIR प्रक्रिया पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने SIR प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा अधिक सरल और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी SIR को तत्काल रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है।
शिल्पी नेहा तिर्की ने SIR पर क्या कहा ?
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि मौजूदा प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के बीच कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर इसे रद्द कर ऐसी व्यवस्था के साथ दोबारा शुरू किया जाए, जिससे सभी वर्गों के मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान और सुलभ हो। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब झारखंड में SIR का दावा और आपत्ति वाला चरण चल रहा है और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
इरफान अंसारी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए आरोप
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी SIR को लेकर निर्वाचन आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने झारखंड में SIR को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि दस्तावेज और सत्यापन की प्रक्रिया से आम लोगों को परेशानी हो रही है। इरफान अंसारी ने ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। उनके बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोप उनके अपने दावे हैं, जिनकी पुष्टि के रूप में कोई स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं किया गया है।
झारखंड में SIR की स्थिति क्या है ?
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार झारखंड में SIR के तहत 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक BLO की घर-घर प्रक्रिया, पांच अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची और उसके बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख सात अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। हालांकि 26 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है और अब झारखंड की अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद ?
SIR को लेकर मुख्य बहस मतदाता सूची के सत्यापन, नाम जोड़ने-हटाने और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी है। झारखंड में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े नेताओं ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।23 सितंबर को JMM और कांग्रेस नेताओं की ओर से भी CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे। बाद में BJP ने इन आरोपों पर पलटवार किया था। इसी बीच, चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की मीडिया रिपोर्ट भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि सदस्यों के बीच सुझाव, सवाल और अलग-अलग राय आना उसकी आंतरिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब आगे क्या ?
फिलहाल झारखंड में SIR प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल किए जा सकते हैं। इसके बाद आवेदनों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जानी है। ऐसे में शिल्पी नेहा तिर्की और इरफान अंसारी की ओर से SIR पर उठाए गए सवालों के बीच अब नजर इस बात पर होगी कि निर्वाचन आयोग इन आपत्तियों और दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची कब और किस प्रक्रिया के तहत जारी करता है। मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक अंतिम सूची 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी है।