नई दिल्ली | 8 जुलाई 2026

तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख थलापति विजय को बड़ी राहत देते हुए डीएमके की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके करूर दौरे और राज्य सरकार के मंत्रियों की सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय किसी मुख्यमंत्री की राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों को नियंत्रित नहीं करेगा।

पीड़ित परिवारों से मिलने जाएंगे विजय

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मुख्यमंत्री विजय करूर जाकर भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की गई है। डीएमके ने इस दौरे पर रोक लगाने की मांग की थी।

DMK ने जांच प्रभावित करने का लगाया आरोप

डीएमके ने अपनी याचिका में कहा कि 27 सितंबर 2025 को हुए करूर भगदड़ मामले की जांच पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी जा चुकी है। साथ ही पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में निगरानी समिति भी गठित की गई है। पार्टी का आरोप था कि सत्ता में आने के बाद टीवीके और उसके नेताओं के सार्वजनिक बयान जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की अवकाशकालीन पीठ ने डीएमके की दलीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों को अदालत में नहीं लाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, "क्या आप चाहते हैं कि अदालत आपके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को बोलने से रोक दे? सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं है। यदि कोई नेता बयान देता है, तो उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दिया जाना चाहिए, अदालत में नहीं।"

एफआईआर में विजय आरोपी नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि करूर भगदड़ मामले में दर्ज एफआईआर में मुख्यमंत्री विजय का नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके दौरे पर रोक लगाने या बयानबाजी पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। इसके साथ ही डीएमके की याचिका खारिज कर दी गई।