सना, 11 सितंबर 2026 : यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सेनाओं के बीच जारी संघर्ष में हूतियों की बड़ी बढ़त की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक हूती लड़ाकों ने पश्चिमी यमन के करीब 2,600 वर्ग किलोमीटर इलाके में अपना नियंत्रण मजबूत किया है। इसके साथ ही रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हूतियों के मोखा बंदरगाह शहर पर कब्जे और तटीय इलाकों में आगे बढ़ने से लाल सागर के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उनका प्रभाव बढ़ने की बात कही जा रही है। हालांकि, बाब-अल-मंदेब को पूरी तरह बंद करने की क्षमता या ऐसी किसी कार्रवाई को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मोखा पर कब्जे से बदला युद्ध का समीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाकों ने हेस, अल-खौखा, अल-वाजियाह, मोखा और खालिद इब्न अल-वलीद मिलिट्री कैंप समेत कई रणनीतिक इलाकों में बढ़त बनाई है। यमनी सरकारी सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि हूती लड़ाके पेरिम द्वीप के करीब तक पहुंच गए हैं। पेरिम द्वीप बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मुहाने के पास स्थित है। ऐसे में यहां हूतियों की मौजूदगी लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर सकती है।
क्या बाब-अल-मंदेब बंद कर सकते हैं हूती ?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक शिपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हूतियों की तटीय इलाकों में बढ़त से इस रणनीतिक जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, यह कहना कि हूती निश्चित रूप से बाब-अल-मंदेब को बंद कर सकते हैं, फिलहाल एक संभावित सैन्य परिदृश्य है, न कि घोषित या प्रमाणित कार्रवाई।
सऊदी अरब के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल ?
यमन में हूतियों की बढ़ती सैन्य ताकत का सीधा असर सऊदी अरब और उसके समर्थित यमनी बलों पर पड़ सकता है। पश्चिमी यमन के तटीय क्षेत्र में हूतियों की मजबूत स्थिति उन्हें सऊदी अरब और क्षेत्र में उसके हितों के खिलाफ दबाव बढ़ाने का रणनीतिक विकल्प दे सकती है। यमन में लंबे समय से चल रहे संघर्ष में हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन मिलने के आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान से मिले हथियार, फंडिंग और सैन्य विशेषज्ञता ने हूतियों की क्षमताओं को मजबूत किया है।
ईरान की भूमिका पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी और क्षेत्रीय सूत्रों ने हूतियों को अतिरिक्त हथियार, फंड और सैन्य सहयोग मिलने का दावा किया है। यह भी कहा गया है कि ईरान से जुड़े IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों ने हूती अभियानों में मदद की। हालांकि, ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर जरूरी है। यमन में हूती समूह की ड्रोन और मिसाइल क्षमता में पिछले वर्षों में बढ़ोतरी जरूर देखी गई है और लाल सागर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ाई है।
मोखा ईरान और हूतियों के लिए क्यों अहम ?
मोखा बाब-अल-मंदेब से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में इस इलाके पर नियंत्रण हूतियों को लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करने का रणनीतिक फायदा दे सकता है। अगर पश्चिमी यमन में हूतियों का प्रभाव आगे भी बढ़ता है, तो इसका असर सऊदी अरब, लाल सागर की शिपिंग और वैश्विक व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सऊदी समर्थित सेनाएं इस बढ़त को रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं।




