वॉशिंगटन, 11 सितंबर 2026 : आज चांद पर इंसानी मिशन, मून बेस और अंतरिक्ष अनुसंधान की बातें हो रही हैं, मगर करीब छह दशक पहले अमेरिका ने चंद्रमा को लेकर एक ऐसा सीक्रेट प्लान तैयार किया था, जिसने बाद में पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। इस योजना का नाम था Project A119। इसका उद्देश्य चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट की संभावनाओं का अध्ययन करना था। हालांकि सबसे अहम बात यह है कि चंद्रमा पर कभी परमाणु बम नहीं गिराया गया और न ही कोई परमाणु विस्फोट किया गया। Project A119 अध्ययन और व्यवहार्यता के आकलन के स्तर तक ही सीमित रहा है।

स्पुतनिक लॉन्च के बाद अमेरिका की बढ़ी बेचैनी

साल 1957 में सोवियत संघ ने Sputnik नाम से दुनिया का पहला कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा। इस सफलता ने अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चल रही Space Race को और तेज कर दिया।इसके बाद 1958 में अमेरिकी वायुसेना से जुड़े शोधकर्ताओं के एक समूह ने चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट की संभावनाओं पर अध्ययन शुरू किया। इस प्रोजेक्ट का आधिकारिक नाम “A Study of Lunar Research Flights” बताया गया, जबकि इसका गुप्त नाम Project A119 था। इस अध्ययन का नेतृत्व वैज्ञानिक Leonard Reiffel ने किया था।

चांद पर परमाणु विस्फोट क्यों करना चाहते थे ?

Project A119 का मकसद सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग करना नहीं था। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, इसके पीछे अमेरिका की तकनीकी और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने की सोच भी थी। कल्पना यह थी कि चंद्रमा की सतह पर परमाणु विस्फोट होने पर पृथ्वी से एक बड़ी चमक दिखाई दे सकती है और चंद्र सतह से धूल व मलबे का एक बड़ा बादल उठ सकता है। उस दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच अंतरिक्ष में बढ़त हासिल करने की होड़ चल रही थी। ऐसे में चंद्रमा पर किसी बड़े विस्फोट का प्रदर्शन अमेरिका की ताकत का प्रतीक माना जा सकता था।

क्या चांद पर बनता 'मशरूम क्लाउड'?

Project A119 से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट के बाद मशरूम क्लाउड की तस्वीर पेश की जाती है। लेकिन यह कल्पना पृथ्वी के वातावरण जैसी परिस्थितियों पर आधारित है।चंद्रमा पर पृथ्वी जैसा घना वायुमंडल नहीं है। इसलिए वहां परमाणु विस्फोट के बाद पृथ्वी पर दिखाई देने वाले पारंपरिक मशरूम क्लाउड जैसा दृश्य बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, अध्ययन में चंद्रमा के उस हिस्से को ध्यान में रखा गया था जो पृथ्वी से दिखाई देता है और रात के समय अंधेरे में होता है, ताकि विस्फोट से पैदा होने वाली चमक पृथ्वी से देखी जा सके।

फिर Project A119 का क्या हुआ ?

Project A119 पर वैज्ञानिकों ने अध्ययन और व्यवहार्यता से जुड़े आकलन किए, लेकिन यह योजना कभी वास्तविक ऑपरेशनल मिशन में नहीं बदली। न तो किसी परमाणु हथियार को चंद्रमा की ओर लॉन्च किया गया और न ही चंद्रमा की सतह पर कोई परमाणु उपकरण विस्फोटित किया गया। बाद में इस योजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक की। इससे यह सामने आया कि Cold War और Space Race के दौर में अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी ताकत दिखाने के लिए कितने असाधारण विकल्पों पर विचार कर रहा था।

अमेरिका ने आखिर क्यों छोड़ दिया यह प्लान ?

Project A119 को आगे बढ़ाने के बजाय अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपनी उपलब्धियां दूसरे तरीकों से दिखाने पर ध्यान दिया। आगे चलकर अमेरिका का Apollo Program विकसित हुआ और 1969 में इंसान पहली बार चंद्रमा की सतह पर पहुंचा। इस तरह चांद पर परमाणु विस्फोट का विचार इतिहास के पन्नों में एक गुप्त और विवादास्पद अंतरिक्ष योजना के रूप में रह गया। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि Project A119 एक प्रस्तावित अध्ययन था, कोई सफल परमाणु मिशन नहीं। चंद्रमा पर परमाणु बम विस्फोट कभी नहीं किया गया।