न्यूयॉर्क/इस्लामाबाद, 27 अक्टूबर 2026 : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग के बीच पाकिस्तान ने नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर देने का विरोध किया है। पाकिस्तान का साफ कहना है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और नए देशों को वीटो का अधिकार देने से मौजूदा असमानताएं और गहरी हो सकती हैं। इससे परिषद के कामकाज में गतिरोध बढ़ने का खतरा भी है। यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा में वीटो पावर के इस्तेमाल और सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर हुई चर्चा के दौरान आया। पाकिस्तान ने मौजूदा वीटो व्यवस्था में सुधार की वकालत की, मगर नए स्थायी सदस्यों को समान अधिकार देने पर आपत्ति जताई है।

पाकिस्तान ने वीटो पावर पर क्या कहा ?

रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान मिशन के काउंसलर गुल कैसर सरवानी ने कहा कि वीटो का दुरुपयोग सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता और संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। उनके अनुसार, पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—के पास वीटो होने से वैश्विक फैसलों पर उनका विशेष प्रभाव बना रहता है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि स्थायी सदस्यों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय हितों के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई प्रभावित होती है।

नए स्थायी सदस्यों को वीटो देने का विरोध क्यों ?

पाकिस्तान का तर्क है कि सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य जोड़ने और उन्हें वीटो का अधिकार देने से मौजूदा व्यवस्था की असमानताएं दूर होने के बजाय और मजबूत हो सकती हैं। उसका मानना है कि इससे परिषद में सुधार की प्रक्रिया जटिल होगी और निर्णय लेने में देरी या गतिरोध बढ़ सकता है।हालांकि, सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग विचार हैं। कई देश परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के पक्ष में हैं, जबकि वीटो पावर के विस्तार और नए स्थायी सदस्यों के अधिकारों पर सहमति बनना अब भी चुनौती है।

भारत की मांग और सुरक्षा परिषद में सुधार

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में सुरक्षा परिषद की संरचना आज की राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती। भारत को स्थायी सदस्यता और वीटो पावर मिलना हालांकि केवल मांग से तय नहीं होगा। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन और निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मंजूरियों की जरूरत होगी। इसलिए भारत की स्थायी सदस्यता की मांग और वीटो पावर हासिल करने की प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।

वीटो के इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र का नियम क्या है ?

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अप्रैल 2022 में प्रस्ताव 76/262 पारित किया था। इसके तहत सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य द्वारा वीटो का इस्तेमाल किए जाने पर महासभा में संबंधित मुद्दे पर चर्चा की व्यवस्था की गई, ताकि वीटो के इस्तेमाल पर जवाबदेही बढ़ाई जा सके। पाकिस्तान ने इस व्यवस्था के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि महासभा की सार्वभौमिक सदस्यता और व्यापक प्रतिनिधित्व उसे उन परिस्थितियों में चर्चा का मंच प्रदान करते हैं, जब सुरक्षा परिषद कार्रवाई करने में असमर्थ रहती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत और पाकिस्तान के विचार अलग-अलग हैं। पाकिस्तान नए स्थायी सदस्यों को वीटो देने का विरोध कर रहा है, जबकि भारत स्थायी सदस्यता के साथ अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व की मांग करता है।