इस्लामाबाद, 27 अक्टूबर 2026 : पाकिस्तान की राजनीति में कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के बीच समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। इमरान खान की रिहाई की मांग और पाकिस्तान सरकार तथा उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच गतिरोध खत्म करने की कोशिशों ने मौलाना फजलुर रहमान को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना फजलुर रहमान सार्वजनिक सभाओं में इमरान खान की रिहाई की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार और PTI के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश भी की है। पाकिस्तान की राजनीति में इस बदलाव को अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेताओं के रिश्ते लंबे समय तक तल्ख रहे हैं।
कभी एक-दूसरे पर निशाना साधते थे इमरान और मौलाना
इमरान खान और मौलाना फजलुर रहमान के बीच राजनीतिक टकराव पुराना है। इमरान खान अपने भाषणों में फजलुर रहमान को “मौलाना डीजल” कहकर निशाना साधते रहे हैं। दूसरी ओर मौलाना ने इमरान खान की राजनीति की आलोचना की थी और उन्हें लेकर तीखे बयान दिए थे, मगर पाकिस्तान की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों के हित कुछ मुद्दों पर करीब आते दिखाई दे रहे हैं। मौलाना का इमरान खान की रिहाई का समर्थन करना और सरकार-PTI के बीच बातचीत की पैरवी करना इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी गोपनीय जानकारी से जुड़े विवाद और अन्य मामलों में मुकदमे चल रहे हैं। कुछ मामलों में उन्हें सजा सुनाई गई है, जबकि अलग-अलग मामलों में अदालतों से राहत या सजा निलंबन की स्थिति भी रही है। इमरान खान की जेल में स्थिति और स्वास्थ्य को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति के बारे में ताजा आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
कभी इमरान सरकार के खिलाफ बने गठबंधन की अगुवाई की थी
मौलाना फजलुर रहमान पहले इमरान खान के विरोध में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) की अध्यक्षता की थी। इस गठबंधन ने 2022 में इमरान खान की सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाया और अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार सत्ता से बाहर हो गई। ऐसे में मौलाना का अब इमरान खान की रिहाई की मांग करना पाकिस्तान की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, समर्थन का यह रुख दोनों नेताओं के बीच सभी राजनीतिक मतभेद खत्म होने का प्रमाण नहीं है।
PTI और सरकार के बीच मध्यस्थता की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, उमराह से लौटने के बाद मौलाना फजलुर रहमान से PTI से जुड़े विपक्षी नेताओं ने मुलाकात की और राजनीतिक गतिरोध दूर करने में मदद मांगी। इसके बाद सरकारी मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी उनसे संपर्क किया। मौलाना ने कथित तौर पर सरकार को खैबर पख्तूनख्वा में बल प्रयोग या गवर्नर शासन जैसे कठोर कदमों के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी। इन प्रयासों से राजनीतिक संवाद की संभावनाओं पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, किसी ठोस समझौते या गतिरोध पूरी तरह खत्म होने की पुष्टि अलग से जरूरी है।
क्या मौलाना फजलुर रहमान बनेंगे निर्णायक कड़ी ?
पाकिस्तान में सरकार और PTI के बीच टकराव के बीच मौलाना फजलुर रहमान की भूमिका अहम हो सकती है। उनके विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों से संवाद के रास्ते होने के कारण उन्हें बातचीत के लिए एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। फिर भी इमरान खान की रिहाई का फैसला कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अदालतों के आदेशों पर निर्भर करेगा। अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत की पहल किसी ठोस राजनीतिक समाधान तक पहुंचती है या नहीं।




