वॉशिंगटन/मस्कट, 17 सितंबर 2026 : यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने हूती प्रतिनिधियों के साथ गोपनीय बातचीत की है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों की यह बैठक ओमान की राजधानी मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई थी। बैठक में हूती पक्ष ने अमेरिकी और इजराइली जहाजों को निशाना नहीं बनाने और 2025 में हुए सीजफायर की शर्तों का पालन करने का भरोसा दिया। इसके साथ ही अमेरिका ने यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के लिए सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से फिलहाल दूरी बनाए रखी है। इससे क्षेत्रीय समीकरण और सऊदी-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

मस्कट में हुई गोपनीय बैठक

एक रिपोर्ट के अनुसार यह बैठक पिछले सप्ताहांत मस्कट में हुई। बातचीत में हूती प्रतिनिधिमंडल की ओर से वरिष्ठ नेता मोहम्मद अब्दुलसलाम भी शामिल थे। ओमान ने इस बातचीत को आगे बढ़ाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अमेरिकी विदेश विभाग ने बैठक की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने लाल सागर में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को महत्वपूर्ण अमेरिकी हित बताया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हाल में कहा था कि वॉशिंगटन हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी पहले कहा था कि हूतियों ने अमेरिकी प्रशासन से संपर्क कर यमन के संघर्ष में अमेरिका को सीधे शामिल न होने की इच्छा जताई थी।

सऊदी अरब को सीधे अमेरिकी सैन्य समर्थन नहीं

इस घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मदद की मांग की थी। Axios के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से फोन पर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमले की मांग की थी, लेकिन ट्रम्प ने सीधे अमेरिकी हमले का आदेश नहीं दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन फिलहाल अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी सुरक्षा पर केंद्रित रखना चाहता है। हालांकि अमेरिका सऊदी अरब को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध करा रहा है।

हूती-सऊदी संघर्ष क्यों बढ़ा ?

यमन में हाल के दिनों में हूतियों ने लाल सागर के तटीय इलाकों में अपना नियंत्रण बढ़ाया है। Reuters के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों और बाब-अल-मंदब के आसपास बढ़त बनाई है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।इसके बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच हमले तेज हुए हैं। सऊदी विमानों ने यमन में हूती ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि हूतियों ने सऊदी शहरों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है।

मक्का के पास ड्रोन का दावा, हूतियों ने आरोप खारिज किया

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास एक हूती ड्रोन को मार गिराया गया। सऊदी अधिकारियों ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा मामला बताया है।हालांकि हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है और इसे झूठ बताया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।

सऊदी तेल ढांचे पर हमलों से बढ़ी चिंता

हूतियों के हमलों के बीच सऊदी अरब के तेल ढांचे की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। Reuters के अनुसार, यानबू और सऊदी के ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन से जुड़े व्यवधानों के कारण तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। 15 सितंबर को यानबू समेत कई सऊदी शहरों के लिए जारी आपात चेतावनियों के बाद सिविल डिफेंस ने खतरा कम होने की घोषणा की थी।

हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का किया दावा

हूती पक्ष ने यमन में सऊदी F-15 लड़ाकू विमान को गिराने का दावा भी किया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे हूती पक्ष का दावा बताया गया है, इसलिए इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जाना चाहिए।

अमेरिका के सामने दोहरी चुनौती

अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति इसलिए संवेदनशील है क्योंकि एक ओर लाल सागर में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही उसके प्रमुख हितों में शामिल है, वहीं दूसरी ओर यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप करने से क्षेत्रीय संघर्ष का एक और मोर्चा खुल सकता है। फिलहाल वॉशिंगटन की नीति सीधे यमन युद्ध में उतरने के बजाय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और क्षेत्रीय साझेदारों को आगे रखने की दिखाई दे रही है। इसी बीच अमेरिका और हूतियों के बीच हुई गोपनीय बातचीत ने क्षेत्रीय कूटनीति को नया मोड़ दिया है।