ढाका, 11 सितंबर 2026 : बांग्लादेश का तीस्ता मास्टर प्लान अब सिर्फ जल प्रबंधन का प्रोजेक्ट नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ क्षेत्रीय भू-राजनीति भी जुड़ती नजर आ रही है। चीन के बाद अमेरिका ने भी अब तीस्ता प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखाई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में तीन अलग-अलग अमेरिकी टीमों ने रंगपुर और तीस्ता क्षेत्र का दौरा किया है। हाल ही में पांच सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने तीन दिन तक इलाके का दौरा किया। बताया गया है कि अमेरिकी टीम ने 9 सितंबर को तीस्ता बैराज प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल में अमेरिकी सेना से जुड़े जल-संसाधन इंजीनियर के साथ ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारी भी शामिल थे।

अमेरिकी टीम ने तीस्ता क्षेत्र का किया दौरा

बांग्लादेश जल विकास बोर्ड के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और बोर्ड के इंजीनियरों के बीच तीस्ता प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। हालांकि, इस बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इससे पहले 31 अगस्त को बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट क्रिस्टेंसन ने भी एक तीस्ता बैराज का दौरा किया था। उन्होंने तीस्ता को बांग्लादेश के उत्तर क्षेत्र की जीवनरेखा बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पक्ष तीस्ता मास्टर प्लान को महत्वपूर्ण रणनीतिक और जल प्रबंधन परियोजना के तौर पर देख रहा है। अमेरिकी टीमों द्वारा तकनीकी जानकारी और डेटा जुटाए जाने की भी बात सामने आई है।

तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन की भी नजर

तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर चीन की दिलचस्पी पहले से रही है। बांग्लादेश में चीन की सरकारी कंपनी सिनोहाइड्रो ने तीस्ता मास्टर प्लान को लेकर अध्ययन किया है और परियोजना को लेकर आगे के समझौते की संभावना बनी हुई है। वहीं, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रोजेक्ट को लेकर नई रणनीति दिखाई दे रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में भारत को इस परियोजना के लिए प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। इसके बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने चीन के साथ सहयोग की संभावना पर जोर दिया। अब अमेरिकी टीमों के लगातार तीस्ता क्षेत्र के दौरे ने इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

क्या अमेरिका के साथ भी विकल्प तलाश रहा बांग्लादेश ?

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान तीस्ता प्रोजेक्ट को एजेंडे में प्रमुखता नहीं मिली थी। बाद में BNP सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया कि बांग्लादेश अपने फंड से इस परियोजना को लागू करने की संभावना तलाश रहा है। इसी बीच अमेरिकी टीमों के तीस्ता क्षेत्र के दौरे और तकनीकी जानकारी जुटाने की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बांग्लादेश चीन के साथ-साथ अमेरिका के विकल्प पर भी विचार कर रहा है? क्या तीस्ता प्रोजेक्ट में अमेरिकी तकनीकी या वित्तीय सहयोग की संभावना बन रही है ? फिलहाल इन सवालों पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, भारत, चीन और अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी के बीच तीस्ता प्रोजेक्ट आने वाले दिनों में बांग्लादेश की विदेश और जल कूटनीति का अहम मुद्दा बन सकता है।