बीजिंग, 19 सितंबर 2026 : चीन ने तिब्बत के खनिज संसाधनों के दोहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। चीनी निजी कंपनी शिजांग झिहुई माइनिंग और सरकारी कंपनी झाओजिन नॉनफेरस माइनिंग ने तिब्बत में खनन परियोजनाओं के लिए रणनीतिक सहयोग समझौता किया है। इन दोनों कंपनियां सोना, तांबा, मोलिब्डेनम, क्रोमियम, एंटीमनी, टंगस्टन और जिंक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
तिब्बत के खनिज संसाधनों पर बढ़ रहा फोकस
चीन तिब्बत को प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र मानता है। रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत में कम से कम नौ रणनीतिक खनिज ऐसे हैं, जिनके ज्ञात संसाधन चीन के शीर्ष तीन में शामिल हैं। इनमें तांबा, क्रोमियम, एंटीमनी, सॉल्ट-लेक लिथियम और बोरॉन प्रमुख हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, रक्षा प्रणालियों और उच्च-प्रदर्शन वाले मिश्र धातुओं में किया जाता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर रणनीतिक खनिजों और सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच तिब्बत के संसाधनों का महत्व और बढ़ गया है।
तांबे के विशाल भंडार का दावा
चीन के सरकारी भूवैज्ञानिक सर्वे के अनुसार, 2021 में चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना शुरू होने के बाद से किंघई-तिब्बत पठार पर दो करोड़ टन से अधिक तांबे के भंडार की पहचान की गई है। संस्थान ने पठार पर तांबे की कुल संभावित क्षमता करीब 15 करोड़ टन बताई थी और इस क्षेत्र को बड़े वैश्विक तांबा संसाधन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना जताई थी। तिब्बत में पहले से ही चीन की बड़ी खनन परियोजनाएं सक्रिय हैं। इनमें यूलोंग खदान भी शामिल है, जहां तांबे के साथ मोलिब्डेनम, लोहा और सोने के संसाधन मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूलोंग ने 2025 में करीब 1.52 लाख टन तांबे का उत्पादन किया।
किन कंपनियों ने मिलाया हाथ ?
झिहुई माइनिंग तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जिंक-लेड-कॉपर खदान संचालित करती है। इसके ओपन-पिट ऑपरेशन में 2007 में उत्पादन शुरू हुआ था, जबकि अंडरग्राउंड हिस्से में 2025 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ। इससे खदान की कुल अयस्क आपूर्ति क्षमता करीब चार लाख टन सालाना हो गई है। दूसरी ओर, झाओजिन नॉनफेरस माइनिंग सोने और बेस-मेटल संसाधनों के विकास में सक्रिय है और चीन के युन्नान, गुइझोउ तथा शेडोंग जैसे खनिज-समृद्ध प्रांतों में खनन परियोजनाएं संचालित करती है।
चीन की व्यापक खनिज रणनीति
यह सहयोग केवल तिब्बत की एक परियोजना तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों का संयुक्त मॉडल सफल रहने पर चीन के अन्य उच्च गुणवत्ता वाले नॉन-फेरस माइनिंग प्रोजेक्ट्स में भी अपनाया जा सकता है। हालांकि, तिब्बत जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन आसान नहीं है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, परिवहन और बुनियादी ढांचे की सीमाएं, पर्यावरणीय मंजूरियां और विकास की ऊंची लागत जैसी चुनौतियां परियोजनाओं की गति और लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इस सहयोग को चीन की घरेलू रणनीतिक खनिज आपूर्ति मजबूत करने की व्यापक कोशिश के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।




