नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच Indus Waters Treaty (सिंधु जल संधि) को लेकर विवाद अभी जारी है। इसी बीच डच वॉटर मैनेजमेंट विशेषज्ञ विलेम वैन ड्यूरसेन ने पाकिस्तान को दोनों देशों के बीच नदी प्रबंधन से जुड़े सहयोग को फिर से शुरू करने के लिए छोटे और व्यावहारिक कदम उठाने की सलाह दी है। पाकिस्तानी अखबार Friday Times में प्रकाशित उनके लेख के मुताबिक, केवल किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले से दोनों देशों को जमीनी स्तर पर सहयोग करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने नियमित बातचीत और डेटा साझा करने जैसे व्यावहारिक उपायों से शुरुआत करने की बात कही है।

सिंधु जल संधि पर क्या है विवाद ?

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम उठाए थे। भारत ने सिंधु जल संधि को abeyance यानी अगले आदेश तक स्थगित रखने की घोषणा की थी। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन जारी रहने की स्थिति में सामान्य सहयोग की व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकती। पाकिस्तान ने भारत के इस कदम का विरोध किया है और संधि को बहाल करने की मांग करता रहा है।

डच विशेषज्ञ ने क्या कहा?

विलेम वैन ड्यूरसेन ने अपने लेख में तर्क दिया है कि नदी प्रबंधन से जुड़े समझौतों का प्रभाव केवल कानूनी फैसलों पर निर्भर नहीं करता। उनके अनुसार, जब दोनों देशों के बीच नियमित बैठकें, सूचना साझा करना और तकनीकी स्तर पर सहयोग रुक जाता है, तो किसी अदालत का फैसला भी जमीन पर सहयोग सुनिश्चित नहीं कर सकता। उन्होंने पाकिस्तान को सलाह दी कि किसी बड़े और नए समझौते की कोशिश करने के बजाय छोटे और व्यावहारिक कदमों से शुरुआत की जाए। उनके सुझावों में अधिकारियों के बीच नियमित बातचीत और नदी से जुड़े डेटा के आदान-प्रदान जैसे उपाय शामिल हैं।

कोलोराडो नदी समझौते का दिया उदाहरण

ड्यूरसेन ने अमेरिका की Colorado River व्यवस्था का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि वहां कई राज्यों के बीच लंबे समय से नदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर व्यवस्था चली आ रही है, मगर समय के साथ सहयोग के पुराने तरीकों में समस्याएं सामने आई हैं। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय और अंतर-क्षेत्रीय नदी समझौतों में केवल कानूनी ढांचा पर्याप्त नहीं होता। रोजमर्रा के स्तर पर अधिकारियों के बीच संवाद और जानकारी साझा करना भी महत्वपूर्ण होता है।

कश्मीर विवाद और नदी प्रबंधन को अलग रखने की सलाह

डच विशेषज्ञ ने अपने लेख में यह भी सुझाव दिया कि कश्मीर का राजनीतिक विवाद और नदी प्रबंधन को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, नदी प्रबंधन से जुड़ा तकनीकी सहयोग शुरू करने के लिए कश्मीर विवाद का पूरी तरह समाधान होना जरूरी शर्त नहीं होना चाहिए। हालांकि, यह उनका विश्लेषण और सुझाव है। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर मूल राजनीतिक और सुरक्षा विवाद इससे अलग बना हुआ है।

भारत और पाकिस्तान का रुख

भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले को पाकिस्तान के साथ व्यापक सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे से जोड़ा है। वहीं, पाकिस्तान संधि को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लागू समझौता बताते हुए भारत के कदम का विरोध करता रहा है। इस बीच विशेषज्ञों की राय में भी मतभेद दिखाई देते हैं। ऐसे में ड्यूरसेन का लेख इस विवाद में तकनीकी और व्यावहारिक सहयोग के एक अलग पहलू को सामने रखता है।