अंकारा/इस्लामाबाद, 11 सितंबर 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। भारत के सख्त रुख के बीच पाकिस्तान के सामने इस मुद्दे पर सीमित विकल्प होने की बात कही जा रही है। तुर्की के जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट येवगेनिया मिखाइलिद ने एक लेख में दावा किया है कि मौजूदा स्थिति पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 से पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने भारत के अपने समकक्ष को चिनाब नदी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर चार पत्र भेजे हैं। पाकिस्तान का कहना है कि नदी के बहाव से जुड़े मुद्दों पर उसे भारत से जवाब नहीं मिला है।

भारत की शर्त और पाकिस्तान की परेशानी

तुर्की एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत का रुख यह है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देने से विश्वसनीय और स्थायी रूप से दूर नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि के तहत सहयोग को फिर से सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। भारत लंबे समय से संधि में बदलाव की जरूरत की बात करता रहा है। वहीं पाकिस्तान का रुख रहा है कि Indus Waters Treaty ही दोनों देशों के बीच जल विवादों को सुलझाने का प्रभावी माध्यम है। पाकिस्तान की इंटरनेशनल लॉ विशेषज्ञ खदीजा अलमुस खानम ने भी इस विवाद पर अपनी राय रखी है। उनके मुताबिक, भारत ने 2025 से संधि को स्थगित रखा है, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि कोई भी पक्ष एकतरफा तरीके से संधि को निलंबित नहीं कर सकता।

क्या पाकिस्तान के सामने कोई रास्ता नहीं ?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिंधु नदी प्रणाली पर पाकिस्तान की निर्भरता इस विवाद को बेहद संवेदनशील बनाती है। भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से होकर कई प्रमुख नदियां पाकिस्तान पहुंचती हैं। पाकिस्तान इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए उठाता रहा है। वहीं भारत ने Permanent Court of Arbitration (PCA) की कार्यवाही को लेकर आपत्ति जताई है और इस प्रक्रिया में शामिल होने का विरोध किया है। इससे दोनों देशों के बीच जल विवाद के साथ-साथ कानूनी और कूटनीतिक गतिरोध भी बढ़ा है।

ग्लेशियर पिघलने से बढ़ रही नई चुनौती

सिंधु नदी प्रणाली के लिए जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। रिपोर्ट में काठमांडू स्थित ICIMOD के अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसके मुताबिक सिंधु नदी के प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से आता है। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से आने वाले वर्षों में पानी की उपलब्धता और बाढ़ के जोखिम, दोनों पर असर पड़ सकता है। तुर्की एक्सपर्ट ने आशंका जताई है कि अगर जल प्रवाह में बड़े बदलाव होते हैं तो पाकिस्तान को एक तरफ बाढ़ और दूसरी तरफ सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह एक विशेषज्ञ का आकलन है और इसे निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सिंधु जल संधि पर क्यों बढ़ रहा है तनाव ?

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को विवाद सुलझाने का रास्ता मानता है, जबकि भारत ने मौजूदा मध्यस्थता प्रक्रिया और उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा और सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख और सख्त हुआ। इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश भविष्य में किसी नए समझौते या बातचीत के जरिए जल विवाद का समाधान निकाल पाएंगे, या सिंधु नदी का पानी भारत-पाकिस्तान संबंधों में और बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन जाएगा।