मॉस्को, 21 सितंबर 2026 : रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी शुरुआती नतीजों में सबसे आगे चल रही है। रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, पार्टी को पार्टी-लिस्ट वोटिंग में करीब 57.5% वोट मिले हैं। हालांकि, अंतिम आधिकारिक नतीजे आने बाकी हैं। यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। पुतिन ने मतदान को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों और अपनी युद्ध नीति के प्रति जनता के समर्थन से जोड़कर पेश किया था।
450 सीटों वाली स्टेट ड्यूमा में बहुमत क्यों अहम?
रूस की संसद के निचले सदन को स्टेट ड्यूमा कहा जाता है। इसमें कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी-लिस्ट वोटिंग के जरिए और बाकी 225 सीटें एकल निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं। ड्यूमा में बहुमत या मजबूत समर्थन सरकार के लिए कानूनों, बजट और नीतिगत प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण होता है। यही वजह है कि चुनाव के नतीजे क्रेमलिन की घरेलू नीतियों और यूक्रेन युद्ध से जुड़ी उसकी रणनीति के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
2021 में यूनाइटेड रशिया ने जीती थीं 324 सीटें
पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटें जीती थीं। इस बार भी पार्टी शुरुआती नतीजों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, मौजूदा चुनाव के अंतिम सीट परिणाम और नई ड्यूमा की पूरी संरचना का आकलन अंतिम आधिकारिक आंकड़े आने के बाद ही किया जा सकेगा।
चुनाव में पुतिन उम्मीदवार नहीं थे
व्लादिमीर पुतिन खुद इस संसदीय चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे। यूनाइटेड रशिया पार्टी से उनके राजनीतिक संबंध जरूर मजबूत रहे हैं, मगर वह वर्तमान में पार्टी के सदस्य नहीं हैं। रूस में अगला राष्ट्रपति चुनाव 2030 में होना निर्धारित है। इसलिए 2026 का संसदीय चुनाव सीधे राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं है, लेकिन संसद में सत्ता समर्थक दलों की स्थिति आने वाले वर्षों की सरकार की विधायी क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
युद्ध-विरोधी उम्मीदवारों की भागीदारी पर सवाल
इस चुनाव में युद्ध-विरोधी कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोके जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि उदारवादी पार्टी याब्लोको (Yabloko) को पार्टी के तौर पर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली है, मगर उसके कुछ नेताओं ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा है।Reuters और AP की रिपोर्टों के अनुसार, कई विपक्षी और युद्ध-विरोधी आवाजों पर प्रतिबंध, जेल और अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। वहीं, रूसी सरकार का कहना है कि युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के लिए कुछ प्रतिबंध जरूरी हैं।
मतदान प्रतिशत करीब 57%
रूसी चुनाव आयोग के अनुसार, रविवार शाम तक मतदान प्रतिशत करीब 57% पहुंच गया था। चुनाव तीन दिनों तक चला और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध थी।
चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को पर बड़े ड्रोन हमले
रूस में मतदान के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े ड्रोन हमले हुए। रूसी अधिकारियों के मुताबिक 1,600 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया गया या रोका गया, जिनमें करीब 450 मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। हमलों में मॉस्को क्षेत्र में तीन लोगों की मौत की सूचना दी गई। एक तेल रिफाइनरी और एक आवासीय इमारत को भी नुकसान पहुंचा। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने हमले को चुनाव बाधित करने की कोशिश बताया। यह दावा रूसी अधिकारियों का है; यूक्रेन की ओर से इस विशेष आरोप पर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पुतिन के लिए चुनाव का राजनीतिक महत्व क्या है ?
पुतिन ने चुनाव से पहले कहा था कि लोगों का मतदान यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन को प्रदर्शित करेगा। क्रेमलिन इन नतीजों को अपनी नीतियों और युद्ध के दौरान सरकार के प्रति समर्थन के संकेत के रूप में पेश कर सकता है। हालांकि, विपक्षी समूहों और अंतरराष्ट्रीय आलोचकों ने चुनाव की प्रतिस्पर्धात्मकता और राजनीतिक माहौल पर सवाल उठाए हैं। इसलिए चुनाव परिणामों को रूस की जनता की राय का अकेला या पूर्ण माप मानने से पहले चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की भागीदारी की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।




