कोपेनहेगन/वॉशिंगटन, 19 सितंबर 2026 : यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सैन्य तैयारी और रक्षा खर्च बढ़ाने पर जोर लगातार बढ़ रहा है। NATO देशों ने 2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा से जुड़े खर्च पर लगाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें कम से कम 3.5% हिस्सा सैन्य क्षमता और हथियारों जैसी मुख्य रक्षा जरूरतों पर, जबकि 1.5% तक हिस्सा अहम बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, नागरिक तैयारियों और रक्षा उद्योग से जुड़े क्षेत्रों पर खर्च किया जा सकता है। NATO की योजना सिर्फ नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। गठबंधन की क्षमता बढ़ाने के लिए एयर और मिसाइल डिफेंस, लंबी दूरी के हथियार, लॉजिस्टिक्स, बड़े सैन्य फॉर्मेशन और अन्य सैन्य क्षमताओं पर निवेश बढ़ाया जा रहा है।

2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर

2025 के हेग NATO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक हर साल GDP का 5% रक्षा पर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसमें :

  • 3.5% तक राशि मुख्य सैन्य जरूरतों और NATO Capability Targets को पूरा करने पर खर्च होगी।
  • 1.5% तक राशि critical infrastructure, network protection, civil preparedness, resilience, innovation और defence industry जैसे क्षेत्रों में लगाई जा सकती है।

NATO के मुताबिक इस खर्च का रास्ता 2029 में रणनीतिक परिस्थितियों और नए Capability Targets को देखते हुए फिर से समीक्षा किया जाएगा।

यूरोप की सैन्य तैयारी में अस्पताल और इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल

NATO के 1.5% वाले हिस्से में सिर्फ सैन्य ढांचा ही नहीं, बल्कि नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संकट की स्थिति के लिए तैयार करना भी शामिल है। इसका मतलब है कि सड़कों, नेटवर्क, संचार व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, नागरिक आपदा-तैयारी और रक्षा उद्योग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। NATO ने इसे अपनी overall resilience और defence preparedness का हिस्सा बताया है। यूरोप के अलग-अलग देशों में भी सैन्य और नागरिक तैयारियों को लेकर कई योजनाएं सामने आई हैं। हालांकि इन योजनाओं को एक ही कार्यक्रम का हिस्सा मानने के बजाय संबंधित देशों की अलग-अलग नीतियों के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

Copenhagen में NATO के रक्षा प्रमुखों की बैठक

18 और 19 सितंबर 2026 को डेनमार्क की राजधानी Copenhagen में NATO Military Committee की बैठक हो रही है। इसमें सदस्य देशों के Chiefs of Defence यानी रक्षा प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। NATO के मुताबिक Military Committee गठबंधन का सर्वोच्च सैन्य निकाय है। इस बैठक का आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब NATO अपनी नई defence investment commitments को लागू करने और यूक्रेन युद्ध से सामने आई सैन्य जरूरतों के आधार पर अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रहा है।

हथियारों की खरीद में यूरोप की बड़ी छलांग

SIPRI के आंकड़ों के मुताबिक 2021–25 के दौरान यूरोप के 29 NATO देशों के major arms imports में 2016–20 की तुलना में 143% की बढ़ोतरी हुई। इन देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही। SIPRI के मुताबिक रूस से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं और अमेरिका की यूरोपीय सुरक्षा प्रतिबद्धता को लेकर अनिश्चितताओं ने भी यूरोपीय NATO देशों की हथियारों की मांग बढ़ाई है।पूरे यूरोप के आंकड़े देखें तो 2021–25 में यूरोपीय देशों के arms imports में 2016–20 की तुलना में 210% की वृद्धि हुई। इस अवधि में यूरोप को मिलने वाले हथियारों में अमेरिका की हिस्सेदारी 48% रही।

NATO की तैयारी में नए हथियारों पर जोर

NATO की नई capability requirements में एयर और मिसाइल डिफेंस, लंबी दूरी के हथियार, टैंक और बख्तरबंद वाहन, artillery ammunition, drones, cyber और space capabilities जैसे क्षेत्र शामिल हैं। NATO के मुताबिक गठबंधन को अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए उत्पादन क्षमता भी तेज करनी होगी। इसके लिए defence industry को अधिक तेजी से उत्पादन करने और नई तकनीकों को सैन्य व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

अमेरिका और यूरोप के बीच burden-sharing का मुद्दा

यूरोपीय रक्षा खर्च बढ़ाने की बहस में अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लंबे समय से NATO के यूरोपीय सहयोगियों से अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करने की मांग करते रहे हैं। हालांकि NATO महासचिव Mark Rutte ने 2026 में कहा था कि 5% का फैसला यूरोपीय देशों की अपनी सुरक्षा जरूरतों के आकलन से भी जुड़ा है। वहीं, Reuters की 18 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने यूरोप में अपनी सैन्य तैनाती की समीक्षा भी शुरू की है। इस समीक्षा का उद्देश्य यूरोपीय सहयोगियों की अधिक जिम्मेदारी और अमेरिकी वैश्विक सैन्य जरूरतों के बीच संतुलन देखना है।

रूस के साथ तनाव के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंताएं

NATO अपने दस्तावेजों में रूस को Euro-Atlantic security के लिए दीर्घकालिक चुनौती के रूप में देखता है। यूक्रेन में जारी युद्ध के साथ-साथ साइबर गतिविधियों, ड्रोन घटनाओं और अन्य सुरक्षा चुनौतियों ने यूरोपीय देशों की preparedness पर ध्यान बढ़ाया है। इसलिए अगले करीब एक दशक में NATO की रणनीति केवल अधिक सैनिक या अधिक हथियार रखने तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा defence industry, infrastructure, cyber security, military mobility, civil preparedness और resilience को मजबूत करने से जुड़ा है। यानी यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था को लंबे समय के लिए बदलने की कोशिश चल रही है-जिसमें सेना के साथ-साथ नागरिक और औद्योगिक ढांचे को भी संभावित बड़े संकट के लिए तैयार करने पर जोर है।