इस्लामाबाद/मॉस्को, 3 अक्टूबर 2026 : पाकिस्तान ने रूस को अपने ग्वादर पोर्ट के जरिए अरब सागर तक व्यापारिक पहुंच देने का प्रस्ताव रखा है। पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अवैस लेघारी ने रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान के नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ने पर रूस को अरब सागर और आगे गर्म पानी वाले समुद्री मार्गों तक पहुंच मिल सकती है। पाकिस्तान का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब रूस, मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच वैकल्पिक व्यापार मार्गों को लेकर रणनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ी हुई हैं। ग्वादर को इस संभावित नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव भारत के चाबहार पोर्ट की भूमिका और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर भी चर्चा बढ़ा सकता है।

रूस के लिए 'Warm Water' का मुद्दा क्यों अहम है ?

रूस का समुद्री भूगोल लंबे समय से उसकी विदेश और सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। देश के कई उत्तरी समुद्री क्षेत्र साल के कुछ हिस्सों में बर्फ से प्रभावित होते हैं। इसी वजह से रूस की रणनीति में ऐसे समुद्री मार्गों और बंदरगाहों की अहमियत रही है, जहां सालभर व्यापारिक गतिविधियां संचालित की जा सकें। इसी ऐतिहासिक संदर्भ में रूस की Warm Water Ports तक पहुंच की नीति की चर्चा होती रही है। दक्षिण की ओर अरब सागर तक पहुंच रूस को हिंद महासागर क्षेत्र के बाजारों और समुद्री व्यापार नेटवर्क से जोड़ने का एक संभावित रास्ता दे सकती है।

पाकिस्तान ने रूस को क्या ऑफर दिया है ?

पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, यदि पाकिस्तान INSTC से जुड़ता है तो रूस को ग्वादर के रास्ते अरब सागर तक पहुंच मिल सकती है। पाकिस्तान ग्वादर को अपने China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) के साथ जोड़कर क्षेत्रीय व्यापार के लिए इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में रूस के साथ संभावित कनेक्टिविटी से ग्वादर की आर्थिक और रणनीतिक भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि, यह अभी एक प्रस्ताव है। रूस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है या ग्वादर के जरिए कोई नया स्थायी व्यापारिक मार्ग तय हो गया है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

INSTC में पाकिस्तान की संभावित एंट्री क्यों महत्वपूर्ण है ?

International North-South Transport Corridor (INSTC) की स्थापना की पहल वर्ष 2000 में भारत, रूस और ईरान ने की थी। इसका उद्देश्य समुद्री और रेल मार्गों को जोड़कर भारत, ईरान, रूस और आगे यूरोप के बीच माल परिवहन को अधिक सुगम बनाना है। भारत के लिए ईरान का चाबहार पोर्ट इस व्यापक कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चाबहार के जरिए भारत पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश करता रहा है। पाकिस्तान यदि भविष्य में INSTC से जुड़ता है और ग्वादर को इस नेटवर्क से जोड़ने में सफल रहता है तो क्षेत्रीय व्यापार मार्गों का समीकरण बदल सकता है।

चाबहार और ग्वादर की भौगोलिक नजदीकी

ईरान का चाबहार पोर्ट और पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट अरब सागर के तट पर एक-दूसरे के काफी करीब स्थित हैं। दोनों बंदरगाहों के बीच की दूरी करीब 170 किलोमीटर बताई जाती है। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण दोनों बंदरगाहों को लेकर भारत, ईरान, पाकिस्तान और चीन की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीतियों की तुलना की जाती है। भारत चाबहार में निवेश और संचालन से जुड़ा रहा है, जबकि ग्वादर CPEC का महत्वपूर्ण हिस्सा है और चीन की बेल्ट एंड रोड पहल से जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है ?

रूस अगर ग्वादर के रास्ते अरब सागर तक व्यापारिक पहुंच विकसित करता है, तो इससे क्षेत्र में मौजूद मौजूदा परिवहन नेटवर्क के साथ एक अतिरिक्त विकल्प सामने आ सकता है। हालांकि, इससे चाबहार की भूमिका तत्काल खत्म हो जाएगी, ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। चाबहार और ग्वादर की उपयोगिता केवल दूरी से तय नहीं होती। इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, लागत, राजनीतिक स्थिरता, सीमा-पार कनेक्टिविटी और व्यापारिक व्यवहार्यता जैसे कई कारक किसी भी कॉरिडोर की सफलता तय करते हैं।

बलूचिस्तान की सुरक्षा चुनौती भी बड़ी वजह

ग्वादर की संभावनाओं के साथ सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से विद्रोह और हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। ऐसे माहौल में बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क के संचालन के लिए सुरक्षा एक महत्वपूर्ण सवाल बनी रहेगी। इसलिए पाकिस्तान का रूस को ग्वादर के इस्तेमाल का प्रस्ताव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे वास्तविक और व्यापक व्यापारिक नेटवर्क में बदलने के लिए कई स्तरों पर सहमति और निवेश की जरूरत होगी।

क्या ग्वादर चाबहार का विकल्प बन सकता है ?

फिलहाल इसे सीधे तौर पर चाबहार के विकल्प के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। पाकिस्तान का प्रस्ताव रूस को एक अतिरिक्त समुद्री और व्यापारिक रास्ता उपलब्ध कराने की दिशा में है। आगे रूस इस प्रस्ताव को कितना महत्व देता है, पाकिस्तान INSTC से किस तरह जुड़ता है और ग्वादर को क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है—इन कारकों से ही इस पहल का वास्तविक प्रभाव स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि ग्वादर और चाबहार के आसपास बनने वाले नए व्यापारिक समीकरण हिंद महासागर क्षेत्र की जियोपॉलिटिक्स के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।