रोम/नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026 : इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इटली की सरकार प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने के लिए भी कानूनी प्रावधान लाने की तैयारी शुरू कर रही है। पीएम मेलोनी ने रविवार को अपनी पार्टी Brothers of Italy के युवा संगठन के एक कार्यक्रम में इस बात की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार इस पर काम करना शुरू कर देगी।
कैबिनेट में पेश होगा प्रस्ताव
पीएम मेलोनी के मुताबिक, इन प्रस्तावों को जल्द ही इटली की कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। प्रस्ताव में स्कूलों में चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले बुर्का और नकाब पर रोक के अलावा विदेशी छात्रों के लिए प्रति कक्षा अधिकतम संख्या तय करने की बात है। हालांकि, अभी विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या या प्रतिशत तय नहीं किया गया है। प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद कानून बनने के लिए संसद की प्रक्रिया से गुजरना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी मंजूरी के बाद इसे 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी।
विदेशी छात्रों के माता-पिता को सीखनी पड़ेगी इटैलियन भाषा
प्रस्तावित नियमों का एक और अहम हिस्सा भाषा और स्कूल में एकीकरण से जुड़ा है। मेलोनी ने कहा कि जिन विदेशी छात्रों को इटली की शिक्षा व्यवस्था में घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कत हो रही है, उनके माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा सीखना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि भाषा की समझ बच्चों के स्कूल और समाज में बेहतर एकीकरण में मदद करेगी।
इटली के स्कूलों में विदेशी छात्रों की बढ़ी संख्या
रिपोर्टों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में गैर-इटालियन नागरिकता वाले छात्र कुल विद्यार्थियों का करीब 11.6% हैं। Reuters ने भी इसी अनुपात का उल्लेख किया है। हालांकि, विदेशी मूल और विदेशी नागरिकता वाले छात्रों के आंकड़े एक जैसे नहीं होते, इसलिए दोनों को एक ही श्रेणी मानना सही नहीं होगा। इटली पहले से ही स्कूलों में गैर-इटालियन छात्रों की संख्या को लेकर कुछ प्रशासनिक दिशा निर्देश रखता है। एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, 2010 की एक मंत्रीस्तरीय सर्कुलर में गैर-इटालियन छात्रों के लिए 30% की सीमा का प्रावधान था, मगर स्थानीय परिस्थितियों के कारण इसे कई जगहों पर लचीले तरीके से लागू किया गया।
बुर्का, नकाब और हिजाब में क्या अंतर है?
प्रधानमंत्री मेलोनी के मौजूदा प्रस्ताव में खास तौर पर बुर्का और नकाब का उल्लेख किया गया है। बुर्का पूरे शरीर और चेहरे को ढकता है, जबकि नकाब चेहरे को ढकता है और आमतौर पर आंखों के आसपास का हिस्सा खुला रहता है। वहीं, हिजाब चेहरे को नहीं ढकता, बल्कि सिर और गर्दन को ढकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मेलोनी ने अपने ऐलान में हिजाब पर प्रतिबंध का उल्लेख नहीं किया है।
यूरोप के कई देशों में चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध
यूरोप के कुछ देशों में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर पहले से प्रतिबंध या पाबंदियां लागू हैं। फ्रांस और बेल्जियम में ऐसे प्रतिबंधों को लेकर यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के सामने मामले भी पहुंचे हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, नीदरलैंड्स और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों में अलग-अलग तरह के नियम मौजूद हैं। इटली का मौजूदा प्रस्ताव खास तौर पर स्कूलों पर केंद्रित है। इसलिए इसे पूरे देश में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का या नकाब पर तत्काल लागू हो चुका प्रतिबंध मानना सही नहीं होगा।
अभी कानून नहीं बना है
मेलोनी की घोषणा फिलहाल सरकारी प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे कैबिनेट की प्रक्रिया और उसके बाद संसद की मंजूरी से गुजरना होगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इटली में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लागू हो चुका है। मेलोनी सरकार इन कदमों को स्कूलों में भाषाई और सामाजिक एकीकरण से जोड़ रही है। वहीं प्रस्ताव के विरोध में संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा तक समान पहुंच को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।




