वाशिंगटन, 1 अक्टूबर 2026 : अमेरिका के टेक्सास सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान में हुए तलाक के फैसले को टेक्सास में मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला पाकिस्तान मूल के कारोबारी मोहम्मद अली चौधरी और उनकी पत्नी हीरा अजहर से जुड़ा है। कोर्ट का फैसला मुख्य रूप से इस बात पर आधारित है कि तलाक की कार्यवाही के बारे में पत्नी को पर्याप्त और उचित नोटिस नहीं दिया गया था। अमेरिकी कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को अपने फैसले में निचली अदालतों के निर्णय को पलटते हुए मामले को आगे की कार्यवाही के लिए वापस भेज दिया।
क्या है पूरा मामला ?
हीरा अजहर और मोहम्मद अली चौधरी की शादी 2008 में पाकिस्तान में हुई थी। इसके बाद दोनों अमेरिका चले गए और Houston, टेक्सास में रहने लगे। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, शादी के दौरान दंपती ने 100 मिलियन डॉलर से अधिक की सामुदायिक संपत्ति अर्जित की। 2012 में हीरा पाकिस्तान गई थीं। इसके बाद जनवरी 2013 में चौधरी ने पाकिस्तान में तलाक की प्रक्रिया शुरू की। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार हीरा को इस कार्यवाही की जानकारी नहीं थी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई नोटिस भी नहीं दिया गया। पाकिस्तान में एक स्थानीय अखबार में सिर्फ पांच दिन का नोटिस प्रकाशित किया गया था। हीरा का कहना था कि उन्हें तलाक के बारे में करीब दो साल बाद पता चला।
टेक्सास सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
टेक्सास सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी विदेशी अदालत या प्रक्रिया के फैसले को टेक्सास में मान्यता देने के लिए बुनियादी due process का पालन जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पत्नी को तलाक की कार्यवाही की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। इसलिए पाकिस्तानी तलाक के फैसले को टेक्सास में comity यानी सम्मान/मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने साफ किया कि उसका फैसला हर विदेशी तलाक या हर तलाक प्रक्रिया को स्वतः अमान्य घोषित करने वाला सामान्य नियम नहीं है। फैसला इस मामले की परिस्थितियों और अपर्याप्त नोटिस से जुड़ा है।
पत्नी के लिए क्यों अहम है फैसला ?
पहले टेक्सास की निचली अदालत ने पाकिस्तानी तलाक को मान्यता देते हुए हीरा की तलाक और संपत्ति से जुड़े दावों को आगे बढ़ने से रोक दिया था। टेक्सास सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया है। अब मामला फिर निचली अदालत में जाएगा और वहां आगे की कानूनी कार्यवाही होगी। इससे हीरा को Texas कानून के तहत तलाक और वैवाहिक संपत्ति से जुड़े अपने दावों को आगे रखने का रास्ता मिला है। हालांकि, उन्हें अभी संपत्ति का कोई निश्चित हिस्सा मिल चुका है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
मामला 13 साल बाद फिर चर्चा में क्यों ?
पाकिस्तान में तलाक की प्रक्रिया 2013 में हुई थी, लेकिन हीरा ने अमेरिका लौटने के बाद 2015 में Harris County की अदालत में तलाक की याचिका दायर की थी। निचली अदालतों में लंबे समय तक मुकदमा चलने के बाद मामला टेक्सास सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 25 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को उलटते हुए केस को आगे की कार्यवाही के लिए remand कर दिया।
100 मिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति का मुद्दा
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक यह दंपती टेक्सास में रहते हुए 100 मिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका था। इसी वजह से तलाक के साथ-साथ संपत्ति के बंटवारे का सवाल भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलहाल कोर्ट ने हीरा को संपत्ति का कोई निश्चित हिस्सा देने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अब आगे की सुनवाई में टेक्सास की निचली अदालत संबंधित वैवाहिक और संपत्ति दावों पर निर्णय करेगी।




