इस्लामाबाद, 9 सितंबर 2026 : पाकिस्तान और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही करीबी दोस्ती के बीच अब आर्थिक और सुरक्षा मोर्चे पर नई चिंताएं सामने आई हैं। चीन की कंपनी Power China ने पाकिस्तान की प्रमुख बिजली वितरण कंपनी FESCO (Faisalabad Electric Supply Company) के अधिग्रहण की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तान विदेशी निवेश को बढ़ाने और चीन के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। चीन ने CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) के तहत पाकिस्तान के ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है। ऐसे में किसी बड़े चीनी कारोबारी समूह का महत्वपूर्ण डील से पीछे हटना पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
FESCO डील से क्यों पीछे हटी चीनी कंपनी ?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी कंपनी की ओर से पाकिस्तान की बिजली वितरण कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी लेने की दिलचस्पी दिखाई गई थी। शुरुआती प्रस्ताव में करीब 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की बात सामने आई थी, जिससे कंपनी के प्रबंधन पर भी नियंत्रण मिल सकता था। हालांकि बाद में Power China ने इस प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में निवेश से जुड़े सुरक्षा जोखिम, आर्थिक चुनौतियां और कारोबारी अनिश्चितता विदेशी कंपनियों के लिए बड़ी चिंता बनते जा रहे हैं।
CPEC प्रोजेक्ट्स पर लगातार मंडरा रहा सुरक्षा खतरा
पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और CPEC से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर लगातार हमलों ने बीजिंग की चिंता बढ़ाई है। खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में चीनी कर्मचारियों और परियोजनाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। बलूचिस्तान में CPEC के खिलाफ सक्रिय विद्रोही गुट चीनी परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं। इससे चीन के लिए पाकिस्तान में अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के सामने बड़ी चुनौती
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर हाल ही में चीन का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई थी।पाकिस्तान ने चीनी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था भी तैयार की है, लेकिन इसके बावजूद हमलों का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। यही वजह है कि चीन के लिए पाकिस्तान में नए निवेश को लेकर सुरक्षा जोखिम एक अहम सवाल बन गया है।
चीन का बड़ा निवेश, लेकिन बढ़ता कर्ज भी चुनौती
CPEC चीन के Belt and Road Initiative (BRI) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाकिस्तान में चीन की हिस्सेदारी ऊर्जा, सड़क, परिवहन और बंदरगाह जैसी कई परियोजनाओं में रही है। रिपोर्ट में पाकिस्तान पर चीन के करीब 30 अरब डॉलर के कर्ज का भी उल्लेख किया गया है। वहीं पाकिस्तान अपनी आर्थिक मुश्किलों के बीच महंगे विदेशी कर्ज को कम करने के विकल्प तलाश रहा है।
क्या चीन सच में पाकिस्तान से दूरी बना रहा है ?
FESCO डील से Power China का पीछे हटना अपने आप में चीन-पाकिस्तान संबंधों के खत्म होने का संकेत नहीं है। चीन अभी भी पाकिस्तान में CPEC समेत कई रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। हालांकि, निवेश की सुरक्षा और आर्थिक जोखिम को लेकर बीजिंग की चिंताएं बढ़ती दिख रही हैं। अगर पाकिस्तान चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस भरोसा कायम नहीं कर पाता है, तो भविष्य में नए निवेश और बड़ी परियोजनाओं पर इसका असर पड़ सकता है। पाकिस्तान के लिए चीन सिर्फ एक कारोबारी साझेदार नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक और रणनीतिक सहयोगियों में से एक है। ऐसे में FESCO जैसी डील से चीनी कंपनी का पीछे हटना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि पाकिस्तान में निवेश के जोखिम को लेकर चीन की कंपनियां अब ज्यादा सतर्क हो रही हैं।




