नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष को लेकर भारत से समर्थन की अपील का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो में फराह बलोच नाम से पहचानी जाने वाली एक कार्यकर्ता अपनी मां के साथ तिरंगा लिए दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह भारत के लोगों से बलूचिस्तान के लोगों की आवाज बनने की अपील करती नजर आती हैं। फराह ने वीडियो में ‘भारत माता की जय’ और ‘नमस्ते हिंदुस्तान’ जैसे नारे लगाए और भारत से बलूचिस्तान के संघर्ष के समर्थन की अपील की है। वीडियो में उन्होंने पाकिस्तान सरकार और सेना पर बलूचिस्तान में कथित ज्यादती का आरोप लगाया। हालांकि, वीडियो में किए गए आरोपों और फराह की पहचान से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। सोशल मीडिया पर सामने आए ऐसे दावों को उनके स्रोत और संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।

फराह ने भारत से क्या अपील की ?

वीडियो में फराह खुद को बलूचिस्तान की बेटी बताते हुए भारत और दुनिया के लोगों से समर्थन की अपील करती है। उनका कहना है कि बलूचिस्तान के लोगों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जरूरत है और भारत का समर्थन उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस वीडियो के अंत में वह ‘भारत माता की जय’ और ‘बलूचिस्तान संघर्ष जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो सामने आया है, वहां इससे पहले भी भारत से बलूचिस्तान के मुद्दे पर समर्थन मांगने वाली सामग्री पोस्ट की जा चुकी है।

15 अगस्त के दौरान भी चर्चा में आया था अकाउंट

फराह बलोच नाम का सोशल मीडिया अकाउंट इससे पहले 15 अगस्त को चर्चा में आया था। उस समय एक वीडियो में भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी गई थीं। उस वीडियो में भी खुद को बलूचिस्तान की बेटी बताते हुए भारत से बलूच लोगों की आवाज बनने की अपील की गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बलूचिस्तान के मुद्दे पर समर्थन की अपील किए जाने की बात सामने आई थी।

बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी है असंतोष

बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा प्रांत है। यहां लंबे समय से राजनीतिक असंतोष, अधिक स्वायत्तता और संसाधनों पर स्थानीय अधिकार को लेकर विवाद रहा है। बलूच राष्ट्रवादी समूहों का आरोप है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का पर्याप्त लाभ स्थानीय आबादी को नहीं मिलता और प्रांत आर्थिक तथा सामाजिक विकास में पीछे रह गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा और सशस्त्र संगठनों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को प्रमुख मुद्दा मानती है। इस क्षेत्र में राजनीतिक आंदोलनों के साथ-साथ कई सशस्त्र संगठन भी सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से जटिल बनी हुई है।

संसाधनों को लेकर भी बड़ा विवाद

बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से पाकिस्तान के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। यहां प्राकृतिक गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन पाए जाते हैं। बलूच राष्ट्रवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना रहा है कि इन संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी पर्याप्त नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर अधिक राजनीतिक स्वायत्तता और संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण की मांग समय-समय पर उठती रही है।

पाकिस्तान सरकार और सेना पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप

बलूच कार्यकर्ता और अलगाववादी संगठनों से जुड़े लोग पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों पर गिरफ्तारी, जबरन गायब किए जाने और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। इन आरोपों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने भी अलग-अलग समय पर चिंता जताई है। हालांकि, प्रत्येक मामले और आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर जरूरी है। पाकिस्तान सरकार दूसरी ओर बलूचिस्तान में सुरक्षा अभियान को सशस्त्र हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों से निपटने की कार्रवाई के तौर पर पेश करती रही है।

भारत से मदद की अपील नई नहीं

बलूचिस्तान के कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विदेशों में सक्रिय समर्थकों की ओर से भारत से समर्थन की अपील पहले भी सामने आती रही है। कुछ बलूच राष्ट्रवादी समूह पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग करते हैं, जबकि अन्य समूह अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकारों की बात करते हैं। इसलिए बलूचिस्तान के आंदोलन को एक ही विचारधारा या एक संगठन के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। यहां अलग-अलग राजनीतिक और सशस्त्र समूहों की अलग-अलग मांगें और रणनीतियां रही हैं।

मीर यार का नाम भी रहा है चर्चा में

बलूचिस्तान से जुड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया में मीर यार नाम भी चर्चा में रहा है। उनके नाम से सामने आने वाले संदेशों में बलूचिस्तान की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की जाती रही है। भारत के साथ राजनयिक संबंधों की वकालत करने वाले संदेश भी उनके नाम से सामने आए हैं।हालांकि, सोशल मीडिया पर सक्रिय विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों की वास्तविक प्रतिनिधित्व क्षमता तथा उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग तरीके से की जानी जरूरी है।

भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?

बलूचिस्तान का मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी संवेदनशील है। भारत ने विभिन्न मौकों पर पाकिस्तान में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया है, जबकि पाकिस्तान भारत पर बलूचिस्तान में हस्तक्षेप का आरोप लगाता रहा है। भारत पाकिस्तान के इन आरोपों से इनकार करता रहा है। ऐसे में किसी बलूच कार्यकर्ता की भारत से सार्वजनिक रूप से समर्थन की अपील राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन सकती है।

सोशल मीडिया वीडियो के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

फराह बलोच के नाम से सामने आया वीडियो निश्चित रूप से सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है, मगर वीडियो में किए गए सभी दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में पेश करना कतई उचित नहीं होगा। खास तौर पर उनकी उम्र, स्थान, संगठनात्मक संबद्धता और वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बलूचिस्तान के मुद्दे पर भारत से समर्थन मांगने वाली सोशल मीडिया अपील एक बार फिर चर्चा में आई है और इसने पाकिस्तान में बलूच आंदोलन को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने ला दिया है।