ढाका, 19 सितंबर 2026 : बांग्लादेश और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देशों ने बोगुरा में संयुक्त रूप से ड्रोन निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने की एक योजना बनाई है। यह यूनिट बोगुरा एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित है, जबकि इसी क्षेत्र में बांग्लादेश एयरफोर्स का एक नया एयरबेस बनाने की योजना भी सामने आई है। बांग्लादेश के स्थानीय सरकार राज्य मंत्री मीर शाहे आलम ने जुलाई 2026 में बताया था कि तुर्किये के सहयोग से बोगुरा में संयुक्त ड्रोन निर्माण उद्योग स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि बोगुरा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है और उत्तरी क्षेत्र में बांग्लादेश एयरफोर्स के एक नए बेस को मंजूरी दी गई है।

बोगुरा में एक साथ ड्रोन फैक्ट्री और एयरफोर्स बेस

बोगुरा में प्रस्तावित ड्रोन फैक्ट्री को एयरपोर्ट और नए एयरफोर्स बेस के आसपास विकसित करने की योजना है। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में प्रस्तावित एयरबेस देश का पहला प्रमुख एयरफोर्स बेस होगा और यहां भविष्य में नए लड़ाकू विमानों को तैनात करने की योजना बताई गई है।इस तरह एक ही क्षेत्र में एयरपोर्ट, एयरफोर्स बेस और ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित करने की योजना बांग्लादेश के रक्षा और एयरोस्पेस ढांचे के विस्तार की ओर इशारा करती है।

तुर्किये के साथ ड्रोन सहयोग क्यों बढ़ रहा है ?

बांग्लादेश और तुर्किये का रक्षा सहयोग नया नहीं है। दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार बढ़े हैं। The Diplomat के अनुसार, ड्रोन इस बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रमुख हिस्सा हैं और दोनों देश बांग्लादेश में कुछ सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं।बांग्लादेश ने 2022 में तुर्किये की Baykar से Bayraktar TB2 ड्रोन खरीदने का समझौता किया था। The Diplomat की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेशी सेना ने तुर्किये से मिले TB2 ड्रोन को अपनी सैन्य क्षमता में शामिल किया है।

सिर्फ खरीद नहीं, अब स्थानीय निर्माण पर जोर

बांग्लादेश-तुर्किये रक्षा संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव स्थानीय उत्पादन की दिशा में बढ़ता कदम है।The Diplomat की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका तुर्किये की सहायता से कुछ रक्षा उपकरणों का स्थानीय स्तर पर निर्माण करने में रुचि रखता है, खास तौर पर ड्रोन के क्षेत्र में। संभावित सहयोग में तकनीकी सहायता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जुलाई में बांग्लादेशी अधिकारियों ने भी बोगुरा में संयुक्त ड्रोन फैक्ट्री की योजना की पुष्टि की थी।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बोगुरा ?

बोगुरा बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के अपेक्षाकृत करीब है। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के कारण बांग्लादेश में किसी बड़े सैन्य और एयरोस्पेस ढांचे का विकास भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण विषय है।हालांकि, केवल ड्रोन फैक्ट्री बनने की योजना को भारत के खिलाफ सैन्य खतरे का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी मुख्य रूप से बांग्लादेश की रक्षा क्षमता और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की योजना को दिखाती है।

तुर्किये-पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में भी बढ़ा रक्षा सहयोग

तुर्किये और पाकिस्तान के बीच भी रक्षा सहयोग काफी व्यापक है। तुर्किये की रक्षा कंपनियों और पाकिस्तान के बीच ड्रोन, एयरोस्पेस और सैन्य तकनीक को लेकर सहयोग पहले से मौजूद है। वहीं बांग्लादेश के साथ तुर्किये का रक्षा संबंध भी अब केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं रहने की दिशा में बढ़ रहा है। The Diplomat के मुताबिक, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए मंत्रीस्तरीय संयुक्त समितियों और नियमित '2+2' संवाद की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

बांग्लादेश की रक्षा क्षमता में बड़ा बदलाव ?

बोगुरा में प्रस्तावित ड्रोन फैक्ट्री, नए एयरफोर्स बेस और एयरपोर्ट के विकास को एक साथ देखा जाए तो बांग्लादेश अपने उत्तरी क्षेत्र में एक नया एयरोस्पेस और रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर हब विकसित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि फैक्ट्री की वास्तविक उत्पादन क्षमता, निवेश की अंतिम राशि, किस प्रकार के ड्रोन बनाए जाएंगे और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। फिलहाल इसे बांग्लादेश-तुर्किये रक्षा सहयोग के विस्तार और स्थानीय ड्रोन निर्माण की योजना के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा, न कि भारत के खिलाफ किसी घोषित सैन्य रणनीति के रूप में।