इस्लामाबाद, 8 सितंबर 2026 : पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ कथित उत्पीड़न, हिंसा और धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। जेनेवा से जारी एक बयान में विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अहमदिया समुदाय समेत सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने की अपील की है। UN विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि अहमदिया समुदाय के खिलाफ होने वाली हिंसा और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से दंडमुक्ति का माहौल बन रहा है।
अधिकारियों की भूमिका पर UN ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के बयान में कहा गया कि पाकिस्तान को हिंसा और नफरत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की उस प्रवृत्ति को खत्म करना चाहिए, जिससे हमलों को बढ़ावा मिलता है। विशेषज्ञों ने अधिकारियों की कथित निष्क्रियता और मौन समर्थन को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, भय का माहौल लोगों और संस्थाओं को अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने से रोक सकता है।
1974 में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित किया गया
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की कानूनी स्थिति लंबे समय से विवाद का विषय रही है। वर्ष 1974 में पाकिस्तान की संसद ने संवैधानिक संशोधन के जरिए अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित किया था।इसके बाद 1984 में लागू किए गए कानूनी प्रावधानों के तहत अहमदियों की धार्मिक पहचान और अपनी आस्था को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। अहमदिया समुदाय के अधिकारों से जुड़े संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की ओर से समय-समय पर इन प्रावधानों और उनके इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
धार्मिक त्योहारों और पहचान को लेकर भी विवाद
UN विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में धार्मिक त्योहार मनाने के दौरान अहमदिया समुदाय के सदस्यों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर व्यक्ति को विचार, अंतरात्मा, धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का अधिकार है। किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर डराने, धमकाने, हिंसा या भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए।
पूजा स्थलों और कब्रिस्तानों को लेकर भी चिंता
अहमदिया समुदाय से जुड़े पूजा स्थलों और कब्रों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। समुदाय का आरोप रहा है कि धार्मिक स्थलों और कब्रिस्तानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती। UN विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से ऐसी घटनाओं को रोकने और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
UN ने पाकिस्तान से क्या कहा ?
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि देश में सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के कानून के तहत समान सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के धर्म या विश्वास के आधार पर उसके अधिकारों को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी जोर दिया कि शांतिपूर्वक अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने के अधिकार की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। कुल मिलाकर, अहमदिया समुदाय को लेकर पाकिस्तान की नीतियां एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बहस के केंद्र में हैं। UN विशेषज्ञों की ताजा चिंता ने धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और कानून के समान इस्तेमाल को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है।




