इस्लामाबाद , 7 सितंबर, 2026 : पाकिस्तान में करीब 125 साल पुराने एक हिंदू मंदिर के ढहाए जाने की रिपोर्ट के बाद धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर सवाल उठ गए हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक पुराने धार्मिक ढांचे को हटाए जाने के मामले पर पाकिस्तान के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान की इस मामले में प्रतिक्रिया उकसावे वाली है।

पाकिस्तान में 125 साल पुराने मंदिर को लेकर विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित करीब 125 साल पुराने मंदिर का ढांचा 21 अगस्त को गिर गया। इस मामले को लेकर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अधिकार समूहों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने मंदिर को जानबूझकर गिराए जाने के आरोप से इनकार किया है। पाकिस्तान सरकार के मुताबिक बारिश के कारण मंदिर का एक हिस्सा ढह गया था, जिसके बाद पूरा ढांचा गिर गया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर से लगी जमीन एक मदरसे को लीज पर दी गई थी, जबकि मंदिर की जमीन लीज पर नहीं दी गई थी।

अल्पसंख्यक संगठन ने लगाए गंभीर आरोप

‘डॉन’ की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा ने मंदिर के ढांचे को तोड़े जाने और वहां से निर्माण सामग्री हटाए जाने का आरोप लगाया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सहोत्रा और स्थानीय लोगों ने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही धार्मिक स्थल की सुरक्षा में कथित लापरवाही को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी रखी गई।

सहारनपुर मामले पर पाकिस्तान ने क्या कहा ?

दूसरी ओर, सहारनपुर में धार्मिक ढांचे को हटाए जाने के मामले पर पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भारत की आलोचना की। उन्होंने इसे कथित तौर पर ‘इस्लामोफोबिक’ और ‘हिंदुत्व-संचालित’ अभियान से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने की अपील की। यही बयान अब पाकिस्तान में मंदिर से जुड़े विवाद के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि किसी दूसरे देश के धार्मिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले पाकिस्तान को अपने यहां अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर बहस

पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों में चिंता जताई जाती रही है। मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, जबरन धर्म परिवर्तन और अल्पसंख्यकों के अधिकार जैसे मुद्दे लगातार बहस का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान में मंदिर गिराए जाने की मौजूदा घटना को लेकर सरकारी पक्ष और अल्पसंख्यक संगठनों के आरोपों में अंतर है। इसलिए मंदिर के ढहने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी का अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

सहारनपुर और पाकिस्तान का बयान क्यों बना मुद्दा ?

एक तरफ पाकिस्तान की सरकार भारत में धार्मिक अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर उसके अपने देश में मंदिर के ढांचे को लेकर विवाद सामने आया है। इसी विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में पाकिस्तान के Double Standards पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि दोनों मामलों की कानूनी और स्थानीय परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित प्रशासन और जांच एजेंसियों के आधिकारिक तथ्यों को देखना जरूरी है।