काठमांडू/नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026 : नेपाल की नई सरकार भारत के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार बदले हुए राजनीतिक माहौल में भारत के साथ संबंधों को “रीसेट” करना चाहती है। स्वर्णिम वागले ने कहा कि नेपाल अब पुराने राष्ट्रवादी विमर्श से आगे बढ़कर व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, Reconstruction और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-नेपाल संबंधों में मौजूद संवेदनशील मुद्दों, जैसे सीमा विवाद से बचा नहीं जाएगा, मगर उन्हें बातचीत और कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश होगी।
'भारत विरोधी राष्ट्रवाद का दौर खत्म'
वागले ने The Hindu को दिए इंटरव्यू में कहा कि नेपाल सरकार उस पुरानी सोच से आगे बढ़ना चाहती है जिसमें नेपाली राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावना से जोड़ा जाता था। उनके मुताबिक, सरकार आर्थिक अवसरों को बढ़ाने, भारत की सप्लाई चेन से बेहतर तरीके से जुड़ने, कनेक्टिविटी सुधारने और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अपडेट करने पर जोर देगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब नेपाल की नई सरकार भारत के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को लेकर सक्रिय बातचीत कर रही है।
भारत दौरे पर आए थे वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले
स्वर्णिम वागले ने सितंबर में अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत भारत का दौरा किया। नई दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच पोस्ट-फ्लड reconstruction, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर विशेष रूप से चर्चा हुई। भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया गया। स्वर्णिम वागले ने भारत से नेपाल में हालिया बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए सहयोग की भी मांग की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि नेपाल को आपदा के बाद infrastructure reconstruction के लिए भारत के समर्थन की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।
Trade और Connectivity पर नेपाल का फोकस
वागले के मुताबिक, नेपाल भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। इसके लिए air routes, रेल लिंक, integrated checkposts और सड़क जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अपडेट करने की जरूरत भी बताई। उनका कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी और updated trade arrangements से नेपाल को भारतीय बाजार और supply chains से जुड़ने में मदद मिल सकती है।
सीमा विवाद पर भी बातचीत जारी रखने की बात
नेपाल-भारत संबंधों में सीमा विवाद लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। वागले ने कहा कि नई सरकार इस तरह के विवादों से बचने के बजाय उन्हें “constructively” यानी रचनात्मक तरीके से उठाएगी। हालांकि, उनका कहना है कि ऐसे विवादों को दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर हावी नहीं होने दिया जाना चाहिए। नेपाल सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी विवादों के समाधान के लिए सड़क पर जनभावना भड़काने के बजाय कूटनीतिक बातचीत का समर्थन किया है।
China को लेकर भारत की चिंताओं का भी जिक्र
नेपाल के वित्त मंत्री ने चीन के साथ नेपाल की बढ़ती भागीदारी और खासकर Energy Sector में चीनी involvement को लेकर भारत की चिंताओं को भी स्वीकार किया। वागले ने कहा कि नेपाल को बदलती geopolitical reality के बीच अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ अपने संबंधों को अपने हितों के आधार पर देखता है। उन्होंने नेपाल में चीनी प्रभाव को लेकर बनी कुछ धारणाओं पर भी सवाल उठाया और कहा कि चीन की वास्तविक financing और investment की तस्वीर को लेकर perceptions और ground reality में अंतर हो सकता है।
क्या बालेन शाह भारत आएंगे ?
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की पहली bilateral foreign visit भारत की हो सकती है और यह यात्रा 2026 के अंत से पहले होने की संभावना है। काठमांडू के राजनयिक सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया गया है कि यात्रा दशईं और तिहार के बीच हो सकती है। हालांकि अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
नेपाल की विदेश नीति में क्या बदलाव दिख रहा है ?
वागले के बयानों और हाल की भारत यात्रा को देखते हुए नेपाल की नई सरकार के सार्वजनिक रूप से बताए गए फोकस में economic diplomacy, कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा, reconstruction और diplomatic engagement प्रमुख दिखाई देते हैं। हालांकि, “नई विदेश नीति” के नाम से कोई अलग औपचारिक नीति दस्तावेज या अंतिम doctrine घोषित होने की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं है। फिलहाल सरकार के बयानों से उसकी प्राथमिकताओं की दिशा सामने आ रही है। भारत और नेपाल के बीच रिश्ते ऐतिहासिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में नई सरकार का रुख आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




