काठमांडू, 2 अक्टूबर 2026 : नेपाल में आई बाढ़ ने चीन से जुड़ने वाले उसके प्रमुख उत्तरी व्यापार मार्ग को भारी नुकसान पहुंचाया है। रसुवागढ़ी-तिमुरे इलाके में स्थित Gyirong Port Complex और मैत्री पुल को नुकसान पहुंचने के बाद नेपाल-चीन के बीच प्रमुख जमीनी संपर्क प्रभावित हुआ है। इस स्थिति ने नेपाल के व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ से सड़क, पुल, घरों और कई गांवों के साथ-साथ बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ पनबिजली परियोजनाओं के प्रभावित होने से नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।

चीन जाने वाला प्रमुख उत्तरी रास्ता प्रभावित

रसुवागढ़ी-तिमुरे क्रॉसिंग नेपाल के चीन के साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। बाढ़ से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद उत्तरी सीमा से व्यापार और आवाजाही प्रभावित हुई है। नेपाल का एक अन्य प्रमुख उत्तरी बॉर्डर रूट कोदारी-झांगमू भी 2015 के भूकंप के बाद से लंबे समय तक प्रभावित रहा है। ऐसे में रसुवागढ़ी मार्ग के बंद होने से चीन के साथ नेपाल के जमीनी संपर्क पर दबाव और बढ़ गया है।

मैत्री ब्रिज को भी भारी नुकसान

बाढ़ में नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले मैत्री ब्रिज को भी नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। इसके अलावा आसपास के सड़क नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है। हिमालयी क्षेत्र में सड़क, पुल और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा तैयार करना आसान नहीं होगा। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पुनर्निर्माण में लंबा समय लगने की संभावना जताई जा रही है।

भारत के रास्ते जारी है नेपाल का व्यापार

उत्तरी सीमा पर संकट के बीच नेपाल के दक्षिणी हिस्से से जुड़े भारत के प्रमुख व्यापारिक मार्ग सक्रिय बने हुए हैं। बीरगंज और विराटनगर जैसे बॉर्डर पॉइंट नेपाल के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जरूरी सामान की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, ईंधन, मशीनरी और निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए भारत से जुड़े सड़क और बंदरगाह नेटवर्क महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

नेपाल के व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार, नेपाल के कुल विदेशी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 64 प्रतिशत बताई गई है। वहीं चीन नेपाल के आयात के प्रमुख स्रोतों में शामिल है, लेकिन नेपाल के चीन को होने वाले निर्यात की तुलना में चीन से आयात काफी अधिक है। यही वजह है कि नेपाल के लिए भारत और चीन के साथ व्यापारिक संबंधों का संतुलन एक महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा बना हुआ है।

चीन से व्यापार बढ़ाने की कोशिश को झटका?

नेपाल लंबे समय से अपने व्यापारिक विकल्पों को बढ़ाने और भारत पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की कोशिश करता रहा है। चीन के साथ उत्तरी व्यापार कॉरिडोर इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जाता है। हालांकि मौजूदा प्राकृतिक आपदा ने इस वैकल्पिक मार्ग की भौगोलिक और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी चुनौतियों को सामने ला दिया है। इसका असर कितने समय तक रहेगा, यह पुनर्निर्माण की गति और सीमा व्यापार की बहाली पर निर्भर करेगा।

चीन के साथ संपर्क खत्म नहीं, लेकिन चुनौती बढ़ी

बाढ़ से उत्तरी व्यापार मार्ग को नुकसान पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि नेपाल चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंध खत्म कर देगा। चीन नेपाल के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार और आयात स्रोत बना हुआ है। मगर मौजूदा हालात ने यह जरूर दिखाया है कि हिमालयी इलाकों में वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित करने के सामने प्राकृतिक आपदाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों जैसी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। आने वाले समय में Gyirong Port, रसुवागढ़ी-तिमुरे क्रॉसिंग और मैत्री ब्रिज का पुनर्निर्माण नेपाल के लिए अहम होगा। तब तक भारत से जुड़े दक्षिणी व्यापार मार्ग नेपाल की आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रह सकते हैं।