काडमांडू, 31 अगस्त 2026 : नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है, जबकि तिब्बत में 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में अब तक 919 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी ओर 4,200 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। लगातार मिल रहे शवों और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच नेपाल प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण खराब हो चुके हैं।
अज्ञात शवों के लिए तैयार की गईं सैकड़ों कब्रें
नेपाल के चितवन जिले में देवघाट के जंगल क्षेत्र में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार और दफनाने की व्यवस्था की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दिनों में करीब 196 शव दफनाए जा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में अन्य शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन प्रत्येक शव को एक पहचान संख्या देकर उसका रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। बाद में DNA जांच के माध्यम से शवों की पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। हजारों लोगों के अभी भी लापता होने के कारण प्रशासन के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
नेपाल में मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा
नेपाली अधिकारियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। चितवन, नुवाकोट, रसुवा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में तबाही के बाद बड़ी संख्या में घर, सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।
नेपाल-चीन का अहम व्यापारिक मार्ग भी तबाह
बाढ़ से नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में सीमा चौकी, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। यह मार्ग नेपाल के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन से आने वाले सामान की आवाजाही के लिए इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। रास्ता क्षतिग्रस्त होने से व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
90 फीसदी प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। रसुवा में भी बिजली बहाली का काम जारी है। प्रभावित इलाकों में बिजली की समस्या दूर करने के लिए सोलर सिस्टम और सोलर सेट की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि राहत एवं बचाव अभियान के दौरान जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
तिब्बत सीमा के पास बनी झील से खतरा टला
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी एक बैरियर झील का पानी प्राकृतिक रूप से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह बाहर निकल चुका है। इससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में झील के अचानक टूटने और उससे नई बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।
भारत ने भेजी फोरेंसिक टीम
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत की ओर से भी राहत और बचाव में मदद की जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुंच चुकी है। यह टीम मृतकों की पहचान के लिए DNA सैंपल की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद करेगी। इसके अलावा भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर परियोजनाओं में नेपाल सेना के साथ सर्च और रेस्क्यू अभियान में सहयोग किया है।
सद्गुरु ने नेपाल राहत कोष में ₹1 करोड़ देने का ऐलान किया
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए हिमालयी देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया और भारत, चीन, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान के बीच साझा हिमालयी आपदा प्रबंधन व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया।
दलाई लामा ने भी जताया दुख
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से जान गंवाने वाले लोगों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने मृतकों के परिजनों, लापता लोगों और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।




