बेरूत, 11 सितंबर 2026 : इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। इस बीच इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह की करीब दो किलोमीटर लंबी सुरंग को विस्फोट कर तबाह कर दिया है। इजराइल के मुताबिक यह सुरंग हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों का अहम केंद्र थी और इसमें बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक रखे गए थे। सुरंग में विस्फोट के बाद आसपास के इलाकों में 4.1 तीव्रता के भूकंप जैसे तेज झटके महसूस किए जाने की बात सामने आई है। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक धमाके के बाद आसपास के इलाके में जमीन हिलने जैसी स्थिति महसूस हुई। इस कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर सुरंग को नष्ट किए जाने का वीडियो साझा किया है और कहा, “मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर।”

सुरंग में मिले रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन

इजराइली सेना के अनुसार, सुरंग के अंदर ईरान में बने रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन मौजूद थे। इसके अलावा मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल और बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें व अन्य विस्फोटक भी मिलने का दावा किया गया है। सेना का कहना है कि यह पूरा परिसर हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट के कमांड सेंटर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता था।

20 साल में तैयार हुआ था टनल नेटवर्क

नेतन्याहू के मुताबिक, इस भूमिगत नेटवर्क को तैयार करने में करीब 20 साल लगे थे। इजराइल का आरोप है कि इस नेटवर्क को बनाने के लिए ईरान से फंडिंग मिली थी। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इसे आतंकी नेटवर्क बताया है। यह सुरंग दक्षिणी लेबनान के अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित थी। इजराइल का दावा है कि उसने इस इलाके में जमीन के ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इजराइली सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, इलाके में हवाई हमलों के दौरान हिजबुल्लाह के कई लड़ाके मारे गए, जबकि कुछ लड़ाके वहां से भागने में सफल रहे।

क्या है हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट ?

हिजबुल्लाह की बद्र यूनिट दक्षिणी लेबनान में संगठन की प्रमुख सैन्य इकाइयों में से एक मानी जाती है। यह लिटानी नदी के उत्तर में सक्रिय रही है। इस यूनिट का नाम बद्र की लड़ाई से लिया गया है, जो इस्लामी इतिहास में 624 ईस्वी में हुई थी।

दक्षिणी लेबनान में फिर तेज हुए इजराइली हमले

इजराइल ने हाल के दिनों में दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान फिर तेज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जून में अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत के बाद इजराइल और लेबनान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके बाद कुछ समय के लिए हमलों में कमी आई थी। AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र का नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र में अब भी मौजूद है।

हिजबुल्लाह ने क्यों बनाया अंडरग्राउंड नेटवर्क ?

2006 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध के बाद हिजबुल्लाह ने अपने सैन्य ढांचे को ज्यादा सुरक्षित बनाने पर जोर दिया। उस युद्ध में इजराइली हवाई हमलों ने संगठन के कई सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर और हथियार भंडारों को निशाना बनाया था। इसके बाद हिजबुल्लाह ने अपने सैन्य ढांचे के एक बड़े हिस्से को जमीन के नीचे ले जाने की रणनीति अपनाई।

अंडरग्राउंड नेटवर्क से क्या फायदा ?

सुरंगों और बंकरों के जरिए हथियार, गोला-बारूद और लड़ाकों को हवाई हमलों से बचाने की कोशिश की जा सकती है। इन भूमिगत ठिकानों से कमांड और सैन्य गतिविधियों को भी संचालित किया जा सकता है।

क्या सुरंगों का इस्तेमाल सिर्फ हमले के लिए होता है?

नहीं। ऐसे भूमिगत नेटवर्क का इस्तेमाल हथियारों को छिपाने, लड़ाकों की आवाजाही, कमांड सिस्टम चलाने और सैन्य क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए भी किया जा सकता है।

सुरंगें इजराइली सेना के लिए चुनौती क्यों हैं ?

जमीन के ऊपर मौजूद सैन्य ठिकानों की तुलना में सुरंगों का पता लगाना ज्यादा मुश्किल होता है। जमीन के नीचे एक प्रवेश द्वार से कई रास्ते, कमरे और दूसरे हिस्से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे नष्ट करना एक बड़ी चुनौती होती है।

इजराइल सुरंगों का पता कैसे लगाता है ?

इजराइल संभावित सुरंगों और भूमिगत ठिकानों की पहचान के लिए खुफिया जानकारी, मानव स्रोत, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल करता है। किसी क्षेत्र पर संदेह होने के बाद तकनीकी जानकारी और जमीन पर मिले सुरागों के आधार पर सुरंग के प्रवेश और नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है।