इस्लामाबाद, 25 सितंबर 2026 : अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ 1980 के दशक में चले जिहाद और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री मुशाहिद हुसैन सैयद ने एक बड़ा दावा किया है। एक डिजिटल टॉक शो में उन्होंने कहा कि अफगान जिहाद के दौरान पाकिस्तान, अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर बड़े पैमाने पर मुजाहिदीन को समर्थन दिया था। मुशाहिद हुसैन के मुताबिक पाकिस्तान की जमीन पर लड़ाकों को तैयार करने और उन्हें अफगानिस्तान भेजने में ISI की अहम भूमिका थी। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के दौरान एक लाख अफगान मुजाहिदीन और 20 हजार अरब वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग मिली।
मुशाहिद हुसैन ने क्या कहा ?
मुशाहिद हुसैन ने अफगान जिहाद के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब से मिलने वाली सहायता पाकिस्तान के जरिए मुजाहिदीन तक पहुंचाई जाती थी। उनके अनुसार, ISI जमीन पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाली प्रमुख एजेंसियों में शामिल थी। उन्होंने दावा किया कि सोवियत सेना की वापसी और अफगान युद्ध के खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में लड़ाके दूसरे संघर्ष क्षेत्रों की ओर चले गए। उनके मुताबिक, इनमें से कुछ लड़ाके कश्मीर, फिलिस्तीन और अल्जीरिया जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हुए थे।
अमेरिका और सऊदी अरब की फंडिंग का क्या रिकॉर्ड है ?
अमेरिकी सरकार के सार्वजनिक ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि 1980 के दशक में CIA ने अफगान विद्रोहियों के लिए गुप्त सहायता कार्यक्रम चलाया था। नवंबर 1980 के एक दस्तावेज में CIA प्रमुख स्टैंसफील्ड टर्नर ने FY1981 के लिए अफगान कार्यक्रम का बजट 80 मिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा था और बताया था कि अमेरिका और सऊदी अरब लागत को बराबर साझा करेंगे। एक अन्य अमेरिकी सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पाकिस्तान पहले से ही अफगान विद्रोहियों को समर्थन दे रहा था और पाकिस्तान की सैन्य खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ हथियारों की आपूर्ति को लेकर सहयोग की बात की थी। उसी दस्तावेज में सऊदी अरब की ओर से अफगान विद्रोहियों की सहायता का उल्लेख है। 1980 के एक CIA दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि अमेरिकी हथियार पाकिस्तान के रास्ते अफगान लड़ाकों तक पहुंचाए जा रहे थे। हथियारों को पहले पाकिस्तान लाया जाता था और फिर पाकिस्तानी माध्यमों से अफगानिस्तान भेजा जाता था।
क्या पांच अरब डॉलर की रकम ISI को मिली थी?
मुशाहिद हुसैन ने दावा किया कि 1979 से 1989 के बीच करीब पांच अरब डॉलर की रकम इस पूरे अभियान में इस्तेमाल हुई और अमेरिका तथा सऊदी अरब से आने वाली सहायता में ISI की भूमिका थी, लेकिन यहां एक जरूरी तथ्यात्मक अंतर है। अमेरिकी सरकारी रिकॉर्ड अलग-अलग वर्षों और कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग रकम दर्ज करते हैं। अमेरिका के 9/11 Commission Report में कहा गया है कि सऊदी अरब और अमेरिका ने अफगान विद्रोही समूहों को अरबों डॉलर की गुप्त सहायता दी और यह सहायता पाकिस्तान के जरिए पहुंचती थी। रिपोर्ट के मुताबिक ISI ने विद्रोहियों को ट्रेनिंग देने तथा हथियार बांटने में भूमिका निभाई। साथ ही रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि बिन लादेन और उसके साथियों के अपने अलग स्रोत और ट्रेनिंग नेटवर्क थे।
लादेन और जवाहिरी का नाम क्यों महत्वपूर्ण है ?
मुशाहिद हुसैन ने अपने बयान में ओसामा बिन लादेन और अयमान अल-जवाहिरी का भी नाम लिया। दोनों बाद में अल-कायदा के शीर्ष नेताओं के रूप में सामने आए। लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड में बिन लादेन के अफगान नेटवर्क को अलग संदर्भ में देखा जाता है। 9/11 Commission के अनुसार, बिन लादेन और अब्दुल्ला अज़्ज़ाम ने अरब स्वयंसेवकों को अफगान जिहाद से जोड़ने के लिए Maktab al-Khidamat (MAK) बनाया था। रिपोर्ट के अनुसार बिन लादेन और उसके सहयोगियों के अपने वित्तीय स्रोत और ट्रेनिंग नेटवर्क थे। इसलिए “ISI ने लादेन और जवाहिरी को खुद ट्रेनिंग दी” को निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य की तरह पेश करने के बजाय इसे मुशाहिद हुसैन का दावा बताना अधिक सटीक है।
अफगान जिहाद के बाद क्या हुआ ?
सोवियत सेना की वापसी के बाद अफगानिस्तान में मौजूद विभिन्न मुजाहिदीन गुटों के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हुआ। अमेरिकी खुफिया समुदाय के ऐतिहासिक अध्ययन में भी दर्ज है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी और सऊदी समर्थन को मुजाहिदीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अफगान संघर्ष ने पाकिस्तान को अफगान मामलों में पहले से कहीं ज्यादा गहराई से जोड़ दिया। यही दौर आगे चलकर क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्कों के विकास की पृष्ठभूमि बना।
निष्कर्ष
मुशाहिद हुसैन का बयान पाकिस्तान की अफगान जिहाद में भूमिका और ISI के पुराने नेटवर्क पर फिर बहस छेड़ दिया है। अमेरिकी दस्तावेज बताते हैं कि CIA और सऊदी अरब ने अफगान विद्रोहियों को मदद दी और ISI उस सहायता को पहुंचाने और लड़ाकों के नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था।




