टोरंटो, 31 अगस्त 2026 : RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत की सेवा और मानवता की परंपरा पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई, तो देश ने सहायता से कभी पीछे हटने की नीति नहीं अपनाई। कई मौकों पर भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरे देशों की सहायता की है। मोहन भागवत ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषताओं में उसकी विविधता शामिल है। देश में अलग-अलग जातियां, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन यह विविधता एकता के रास्ते में बाधा नहीं है। बल्कि यही भारत की खूबसूरती और उसकी एकता का हिस्सा है। भागवत ने कहा कि इससे भारत को शक्ति मिलती है और यही हमारी पहचान है।

‘ये मेरा, वो तुम्हारा’ की सोच से ऊपर उठने की जरूरत

मोहन भागवत ने कहा कि समाज को ‘यह मेरा है और वह तुम्हारा है’ जैसी सीमित सोच से ऊपर उठना चाहिए। अलग-अलग रूप, रंग, भाषा और पहचान के बावजूद हर व्यक्ति में समान गरिमा और महत्व है। उन्होंने कहा कि लोगों को दूसरों को अलग या पराया मानने के बजाय भाईचारे और सेवा की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

भारत ने अलग-अलग समुदायों को स्वीकार किया

भागवत ने कहा कि भारत की परंपरा सभी समुदायों को स्वीकार करने की रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अत्याचार झेलने वाले लोगों ने भारत में शरण ली और यहां उन्हें जगह मिली। उन्होंने भारत में रहने वाले मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी और अन्य समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि लोग भारत में केवल शरण लेने के लिए ही नहीं आए, बल्कि ज्ञान हासिल करने के उद्देश्य से भी भारत पहुंचे।

‘विविधता एकता की अभिव्यक्ति है’

भागवत ने अपने भाषण में विविधता और एकता के संबंध को समझाते हुए कहा कि भारतीय दृष्टिकोण केवल ‘विविधता में एकता’ तक सीमित नहीं है। भारत की परंपरा विविधता को ही एकता की अभिव्यक्ति के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि देश में कई जातियां, पंथ और भाषाएं हैं। सभी एक जैसे नहीं हैं, लेकिन सभी एक हैं। उनके मुताबिक विविधता प्रकृति का स्वभाव है और एकता वास्तविकता है।

हर व्यक्ति की गरिमा बराबर

RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया में अलग-अलग रूप, रंग और आकार दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें एक समान दिव्यता मौजूद है। इसी सोच के आधार पर समाज में हर व्यक्ति की गरिमा और महत्व को बराबर मानना चाहिए। उन्होंने ‘मेरा-तुम्हारा’ की मानसिकता को संकीर्ण सोच बताते हुए कहा कि दुनिया की चीजों को अपना मानना चाहिए, लेकिन मालिक के तौर पर नहीं बल्कि भाईचारे की भावना से।

सेवा को बताया मानवता का कर्तव्य

भागवत ने कहा कि जब हम सभी को एक मानते हैं तो दूसरों की सेवा करना स्वाभाविक रूप से हमारा कर्तव्य बन जाता है। सेवा से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि लंबे समय तक बनी रहती है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी इस सोच और ज्ञान को दुनिया के साथ साझा करना चाहिए।

2,500 से ज्यादा लोग कार्यक्रम में पहुंचे

टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में कनाडा के आठ प्रांतों से 2,500 से ज्यादा लोगों के पहुंचने का दावा आयोजकों की ओर से किया गया। कार्यक्रम का आयोजन Canadian Hindus for Outreach, Relations and Dialogue (CHORD) ने किया था। कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद रहे।

तीन देशों के दौरे पर हैं मोहन भागवत

मोहन भागवत 17 दिनों के तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं। कनाडा उनके दौरे का दूसरा पड़ाव है। इससे पहले उन्होंने अमेरिका में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। दौरे में अमेरिका और कनाडा के अलावा ब्रिटेन भी शामिल है। भागवत के इस विदेश दौरे के दौरान उनके भाषणों में मानवता, विविधता, सेवा और सामाजिक एकता जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं।