नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 : अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की रेस लगातार तेज होती जा रही है। भारत में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ ओपन-सोर्स AI को बढ़ावा देने की पेशकश की थी। अब चीन ने अमेरिकी टेक कंपनियों की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग की गई थी। बीजिंग ने अमेरिकी टेक इंडस्ट्री की चिंताओं को सुरक्षा के बजाय चीन की तकनीकी प्रगति को रोकने की कोशिश बताया है। चीन के इस रुख से अमेरिका-चीन के बीच चल रही AI और टेक्नोलॉजी की प्रतिस्पर्धा और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

ट्रंप ने कहा था- AI में चीन को पीछे छोड़ना है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि अमेरिका का लक्ष्य AI के क्षेत्र में चीन से आगे रहना है। इसी बीच Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने AI के संभावित खतरों को देखते हुए कंपनियों से मॉडल डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी करने की अपील की। अमोदेई ने यह भी दावा किया कि AI में चीन की बढ़त अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उनकी मांग थी कि अमेरिका चीन को महत्वपूर्ण तकनीक की बिक्री पर और सख्ती करे। उनके विचारों को OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और SpaceX के संस्थापक एलन मस्क का भी समर्थन मिला।

चीन ने AI पर अमेरिकी दबाव को बताया 'डर फैलाना'

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने अमेरिकी टेक लीडर्स की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डर फैलाने, टकराव और गलत नीयत से की गई प्रतिस्पर्धा से वैश्विक AI गवर्नेंस को नुकसान ही होगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी AI डेवलपमेंट को धीमा करने की मांग को चीन को रोकने की रणनीति बताया और इसे 'कोल्ड वॉर प्लेबुक' जैसा करार दिया।

BRICS में जिनपिंग का बड़ा AI प्लान

भारत में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच AI सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सदस्य देशों को ओपन-सोर्स AI विकसित करने में मदद की पेशकश की। जिनपिंग ने AI के लिए ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एक संभावित वैश्विक गवर्नेंस फ्रेमवर्क की जरूरत पर भी जोर दिया। चीन का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और चीन के बीच AI मॉडल, चिप्स और अत्याधुनिक तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

भारत दौरे पर PM मोदी से जिनपिंग की क्या बात हुई ?

भारत की करीब एक दशक बाद यात्रा के दौरान शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जिनपिंग ने कहा कि दोनों नेता 20 से अधिक बार मिल चुके हैं और पिछले कुछ वर्षों में चीन-भारत संबंधों में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने भारत और चीन के संबंधों को रणनीतिक महत्व का बताया। जिनपिंग ने दोनों देशों की आर्थिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि स्थिर और रचनात्मक चीन-भारत संबंध ग्लोबल साउथ के हित में हैं। उन्होंने दोनों देशों से उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक शांति एवं स्थिरता में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की।

अमेरिका और चीन के बीच AI को लेकर क्यों बढ़ रहा तनाव ?

AI की तेज रफ्तार को लेकर अमेरिका में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ चीन AI के विकास को रोकने के बजाय सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नए नियमों की वकालत कर रहा है। चीन के स्टेट सिक्योरिटी मिनिस्टर चेन यिक्सिन ने AI सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए सिस्टम विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने AI को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया क्षेत्र बताया। इसी बीच अमेरिकी एजेंसियों की ओर से चीन की प्रमुख AI कंपनियों पर अमेरिकी AI मॉडल की व्यवस्थित नकल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है।

24 सितंबर को ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात पर नजर

AI को लेकर अमेरिका और चीन के अलग-अलग रुख का असर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आगामी मुलाकात पर भी पड़ सकता है। स्रोत के मुताबिक, शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की 24 सितंबर को वॉशिंगटन में मुलाकात प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI, तकनीकी सुरक्षा और वैश्विक नियमों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद इस बैठक के अहम मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञ बोले- दोनों देश नियम खुद तय करना चाहते हैं

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के एसोसिएट प्रोफेसर जा इयान चोंग के मुताबिक, अमेरिका और चीन दोनों AI के नियमों को अपने तरीके से तय करना चाहते हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना हथियारों की होड़ से की और कहा कि तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों को संयम बरतना होगा।लंदन स्थित सोशल मार्केट फाउंडेशन के डायरेक्टर थियो बर्ट्राम का कहना है कि AI की रफ्तार को पूरी तरह रोकने के लिए अमेरिका और चीन के बीच समझौता मुश्किल हो सकता है, लेकिन दोनों देश अलग-अलग स्तर पर ज्यादा नियम और नियंत्रण लागू कर सकते हैं। अमेरिका और चीन की AI रेस अब सिर्फ तकनीक की प्रतिस्पर्धा नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भविष्य के टेक्नोलॉजी नियमों को तय करने की लड़ाई भी बनती जा रही है।