तेल अवीव, 15 सितंबर 2026 : इजरायल की हाई-सिक्योरिटी जेलों के बाहर मगरमच्छों से भरी गहरी खाइयां बनाने का प्रस्ताव चर्चा में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य जेलों की सुरक्षा बढ़ाना और कैदियों को भागने से रोकना है। हालांकि, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है।

जेलों के बाहर मगरमच्छ रखने का प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने दिसंबर 2025 में अधिकतम सुरक्षा वाली जेलों के आसपास मगरमच्छों वाली खाइयां बनाने का विचार रखा था। प्रस्ताव में जेल के संवेदनशील हिस्सों के चारों ओर गहरी खाइयां बनाकर उनमें मगरमच्छ रखने की बात कही गई है। बताया गया है कि यह विचार अमेरिका के 'Alligator Alcatraz' से प्रेरित है। फ्लोरिडा में प्रवासियों को हिरासत में रखने वाली एक जगह के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया गया था।

मगरमच्छों को लेकर बदले नियम

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में नील मगरमच्छों को लेकर लंबे समय से संरक्षण संबंधी नियम लागू रहे हैं। मौजूदा इजरायली क्षेत्र में जंगली नील मगरमच्छ को आखिरी बार 1905 में देखे जाने की बात कही गई है। इसके बाद ये मगरमच्छ संरक्षण केंद्रों और मगरमच्छ फार्मों जैसी जगहों पर इंसानों की निगरानी में रखे गए। इजरायल ने 2012 में इनके व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी थी। हालांकि, 15 जुलाई 2026 को पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमैन ने मगरमच्छों के 'संरक्षित' दर्जे में बदलाव किया। रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें एक नई श्रेणी में रखा गया, जिससे जेल सेवा के नियंत्रण में इन जानवरों को रखने की संभावनाएं बढ़ीं।

पर्यावरण संगठनों ने जताई आपत्ति

जेलों के आसपास मगरमच्छों वाली खाइयां बनाने के प्रस्ताव का पर्यावरण समर्थकों और वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले से वन्यजीवों के प्रबंधन और पर्यावरण नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह प्रस्ताव इजरायल में मगरमच्छों की स्थिति, उनके कैद में प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों पर चल रही बहस का हिस्सा बन गया है।

क्यों चर्चा में है यह योजना ?

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो अधिकतम सुरक्षा वाली जेलों के आसपास मगरमच्छों वाली खाइयां सुरक्षा व्यवस्था का एक बेहद असामान्य तरीका होंगी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी खाइयों का निर्माण कब शुरू होगा या योजना को अंतिम मंजूरी मिली है या नहीं।फिलहाल यह मुद्दा सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण नियमों को लेकर भी बहस का विषय बना हुआ है।