वॉशिंगटन, 28 सितंबर 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ सैन्य संघर्ष को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध जल्द जीत जाएगा और संघर्ष खत्म होने के बाद दुनियाभर में तेल की कीमतों में भी तेजी से गिरावट आएगी। ट्रम्प ने रविवार को बातचीत में यह बयान दिया। इस बीच उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना अमेरिका के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है और अमेरिका हर हाल में ऐसा कदम उठाएगा। हालांकि जब डोनाल्ड ट्रम्प से पूछा गया कि क्या अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य हमले शुरू हो सकते हैं, तो उन्होंने इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा संभव है, मगर उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से साफ इनकार किया।
ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों माध्यमों से दबाव बना रहा है। उनके मुताबिक सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही बढ़त हासिल कर चुका है।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो गई है। ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर ट्रम्प ने उसकी मुद्रा के कमजोर होने और महंगाई बढ़ने का भी दावा किया। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने की बात कही है।
ईरान ने कहा- नए हमले के लिए तैयार
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होती है तो वह उसका जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम Meet the Press में कहा कि ईरान किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए तैयार है, भले ही संघर्ष एक गंभीर और विनाशकारी युद्ध में बदल जाए। अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत और कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया। उनका कहना था कि शांति की दिशा में मिलने वाले किसी भी अवसर को गंवाया नहीं जाना चाहिए।
ईरान ने रखा था 7 दिन का प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। हालांकि, अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। अराघची के मुताबिक, ईरान एक समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले ईरान विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और धन पर लगी रोक हटाने तथा अपने तेल की बिक्री की अनुमति चाहता है।ईरानी विदेश मंत्री ने इन मांगों को जून में हुए अस्थायी सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन की शर्तों के समान बताया। उनके मुताबिक, बाद में दोनों पक्षों की ओर से हुए जवाबी हमलों के कारण वह व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकी।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव या समुद्री मार्ग के बाधित होने की स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बदलाव का प्रभाव परिवहन लागत और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर होने वाली गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर बनी हुई है।
मिडटर्म चुनाव के बाद फिर बमबारी की चर्चा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रम्प प्रशासन में मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी की संभावना पर चर्चा हुई है। रिपोर्ट में यह दावा अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से किया गया है। इसे अमेरिकी सरकार की घोषित नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, अल जजीरा के पत्रकार माइक हाना ने अमेरिकी प्रशासन के बयानों में बदलाव की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, कभी ट्रम्प ईरान के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत देते हैं, जबकि दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की संभावना भी खुली रखते हैं।
अमेरिका-ईरान बातचीत पर बना हुआ है असमंजस
हालांकि मौजूदा स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तथा सैन्य कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक तरफ ईरान बातचीत और संभावित समझौते के लिए कुछ शर्तों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह किसी नए अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी भी दे रहा है। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प युद्ध को जल्द खत्म करने और जीत हासिल करने की बात कह रहे हैं, लेकिन मिडटर्म चुनाव से पहले संभावित सैन्य कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने संभावना से इनकार भी नहीं किया है। ऐसे में आगे की दिशा कूटनीतिक बातचीत, सैन्य गतिविधियों और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर निर्भर करेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने की आशंका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।




