वॉशिंगटन डीसी, 15 सितंबर 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर दूसरे देशों से खर्च साझा करने की मांग की है। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका लंबे समय से दूसरे देशों के हितों के लिए काम करता आया है, लेकिन ईरान के साथ जारी संघर्ष के दौरान कई देशों ने अमेरिका की कोई मदद नहीं की। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जिन देशों को होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की आवाजाही का फायदा मिल रहा है, उन्हें इसकी सुरक्षा की लागत भी उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संकट खत्म होने के बाद अमेरिका उन देशों से भुगतान की मांग करेगा, जिन्होंने इस दौरान उसका साथ नहीं दिया है।
ट्रम्प पहले भी सात देशों से मांग चुके हैं मदद
ईरान के खिलाफ संघर्ष शुरू होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कई देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में सहयोग की अपील की थी। 16 मार्च को उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर सात देशों से संपर्क किया है। हालांकि उस समय उन्होंने इन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए थे। इससे पहले ट्रम्प ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से भी होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में अमेरिका का साथ देने की उम्मीद जताई थी।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट ?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से बड़ी संख्या में कच्चा तेल और गैस ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। इस समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रम्प का दावा- ईरान समझौता करना चाहता है
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है और जल्द समझौते की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत होगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला अमेरिका ही करेगा। ट्रम्प ने कहा कि जिन देशों को होर्मुज से तेल की आवाजाही का लाभ मिल रहा है, उन्हें इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में भी योगदान देना चाहिए।
अमेरिका ने ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों को बनाया था निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर हमला किया गया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने आठ सितंबर को ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े पांच तेल टैंकरों पर हमला किया। कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। इसके बाद तनाव और बढ़ गया। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में 10 जहाजों पर हमला करने का दावा किया, जिनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल थे। ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन को पकड़ने का दावा भी किया।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
होर्मुज स्ट्रेट अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, मगर यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी कम हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 सितंबर को सिर्फ चार कमोडिटी जहाजों के इस समुद्री मार्ग से गुजरने की जानकारी मिली। इससे एक दिन पहले यह संख्या 10 थी। संघर्ष शुरू होने से पहले रोजाना करीब 125 जहाज यहां से गुजरते थे। ये आंकड़े शुरुआती शिप-ट्रैकिंग डेटा पर आधारित हैं। कुछ जहाज AIS ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके गुजर सकते हैं इसलिए वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। फिर भी आंकड़े बताते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात सामान्य स्तर की तुलना में काफी कम हुआ है।
कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर के पार
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। 15 सितंबर के एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1% से ज्यादा बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इस महीने अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 18% की बढ़ोतरी हो चुकी है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कई हिस्सों तक बड़ी मात्रा में तेल और गैस पहुंचती है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और कीमतों में और तेजी आ सकती है। खास तौर पर उन देशों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं।




